जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को फसल में होने वाले नुकसान का बचाव बताया – बहुजन इंडिया 24 न्यूज

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को फसल में होने वाले नुकसान का बचाव बताया

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संवाददाता :  : मैनपुरी : : अवनीश कुमार :: जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को फसल में होने वाले नुकसान का बचाव बताया

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को फसल में होने वाले नुकसान का बचाव बताया मैनपुरी- जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि किसान बन्धु मक्का एवं अन्य फसल में फाल आर्मी वार्म नियंत्रण समय से करें। इसकी पहचान कीट में मादा ज्यादातर पत्तियों की निचली सतह पर अंडे देती है। कभी-कभी पत्तियों की ऊपरी सतह एवं तनों पर अंडे दे देती है। इसकी मादा एक से ज्यादा परत में अंडे देकर सफेद झाग से ढक देती है। अंडे हल्के पीले या भूरे रंग के होते है। फाल आर्मी वार्म का लार्वा भूरा, घूसर रंग का होता है। इसके पाश्वर् में तीन पतली सफेद धारियों और सिर पर उल्टा अंग्रेज़ी अक्षर का वाई दिखता है। शरीर के दूसरे अंतिम खंड पर वगार्कार चार गहरे बिन्दु दिखाई देते हैं।

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तथा अन्य खंडों पर चार छोटे-छोटे बिन्दु समलम्ब आकार में व्यवस्थित होते हैं। इस कीट का लार्वा मक्के के छोटे पौधों के गोभ के अंदर घुसकर अपना भोजन प्राप्त करता है। इस कीट के प्रकोप की पहचान फसल की बढवार अवस्था में पत्तियों में छिद्र एवं पत्तियों के बाहरी किनारों पर कीट द्वारा उत्सजिर्त पदार्थो से की जा सकती है। उन्होने कहा कि इसके नियतंत्रण हेतु अंड परजीवी ट्राइकोग्रामा पे्रटिओसम अथवा टेलीनोमस रेमस के 50 हजार अंडे प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करने से इनकी संख्या में बढोत्तरी में रोक लगायी जा सकती है। 06-08 की संख्या में बर्ड पचर्र प्रति एकड़ लगाकर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। 35-40 फेरोमोन ट्रेप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाकर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। 05 प्रतिशत पौध तथा 10 प्रतिशत गोभ क्षति की अवस्था में कीट नियतंत्रण हेतु एनपीवी 250 एलई अथवा मेटाराइजियम एनिप्सोली 05 ग्राम प्रति लीटर अथवा बैसिलस थुरिनजैनसिस (बीटी) 02 ग्राम प्रति लीटर की दर से प्रयोग करना लाभकारी होता है। इस अवस्था में नीम आयल 05 मिली. लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से भी कीटों की संख्या पर नियंत्रण किया जा सकता है।उन्होने बताया कि 10-20 प्रतिशत क्षति की अवस्था में रासायनिक नियंत्रण प्रभावी होता है, इस हेतु क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी 0.4 मिली. प्रति लीटर पानी अथवा इमामेक्टिन बेनजोइट 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा स्पाइनोसैड 0.3 मिली प्रति लीटर पानी अथवा थायोमेथाक्साॅम 12.6 प्रतिशत$लैम्ब्डासाइहैलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत 0.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। उन्होने कृषकों से कहा है कि किसी भी कीट, रोग व खरपतवार  की समस्या के निवारण हेतु व्हाट्सएप नम्बर-9452247111 अथवा 9452257111 पर प्रभावित पौधों की फोटो सहित अपनी समस्या व पता लिखकर मैसेज भेजें। 48 घंटे के अंदर समस्या निदान हेतु सुझाव प्राप्त करें। तथा निकटतम विकास खंड स्तर पर प्रभारी राजकीय कृषि रक्षा इकाई अथवा जनपद स्तर पर अद्योहस्ताक्षरी कायार्लय सम्पर्क कर सकते हैं।

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