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Ayodhya News :: एटीएम हेल्थ मशीन, मरीजो को मिलेगा भागदौड़ से निजात :- अभय सिंह

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Ayodhya News :: एटीएम हेल्थ मशीन, मरीजो को मिलेगा भागदौड़ से निजात :- अभय सिंह

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संवाददाता : अयोध्या :फूलचन्द्र {CO1} :: Date . 26 . 12 . 2022 : एटीएम हेल्थ मशीन, मरीजो को मिलेगा भागदौड़ से निजात :- अभय सिंह

मरीजो के लिए बरदान साबित होगा, एटीएम हेल्थ मशीन, मरीजो को मिलेगा भागदौड़ से निजात :- अभय सिंह अयोध्या जिले के विकास खंड तारुन में गोसाईगंज सपा विधायक अभय सिंह ने तारुन क्षेत्रवासियों को इलाज को एटीएम हेल्थ मशीन का बड़ा तोफा देकर लोगो का दिल जीता,हो रही हैं भूरि भूरि प्रसंसा। उन्होंने अपनी निधि से पांच लाख 40 हजार रुपये की लागत से विधायक निधि से खरीदा एटीएम हेल्थ मशीन मरीजो के लिए बरदान साबित होगी। रविवार को पार्टी नेताओं कार्यकर्ताओं के साथ विधायक अभय सिंह ने सीएचसी अधीक्षक ने डिप्टी सीएमओ डॉ0 राजेश चौधरी, सीएचसी अधीक्षक डॉ0 रोहित चौरसिया के साथ एटीएम हेल्थ मशीन का उदघाटन किया। इस अवसर पर जांच कराने को लेकर मरीजो का रेला सीएचसी पर उमड़ पड़ा और बड़ी संख्या में मरीजो ने सीएचसी पहुँच बिना किसी शुल्क के अपनी निःशुल्क जांच कराई।
इस अवसर पर विधायक श्री सिंह ने कहा कि क्षेत्र में भ्रमण के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भर्ती गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए रात्रि में या तो दूर जाना पड़ता था या फिर सुबह का इंतजार करना पड़ता था । जिसको देखते हुये मैंने इस हेल्थ एटीएम मशीन को अपने विधायक निधि से इस केंद्र पर स्थापित करने का काम किया है ।इससे सीएचसी पर आने वाली गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों को जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा । वही अधीक्षक डॉ0 रोहित चौरसिया ने विधायक अभय सिंह को स्वागत में बुके देकर उनका धन्यवाद ज्ञापित किया। कहा कि इस मशीन के लग जाने से मरीजो की बीमारियों की कई जांचे निःशुल्क की जाये।गी जो 24 घर पर कार्य करेगी । यह हेल्थ एटीएम मशीन खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए बरदान साबित होगी । इस मौके पर सपा नेता संजय सिंह राजू, , दीपू सिंह, सियाराम निषाद, नीरज सिंह, अमर सिंह, भारत वर्मा,अनिल भारती, पिंटू सिंह, के के सिंह, आंसू सिंह,जिला पंचायत सदस्य रामस्वरूप फैजाबादी, डॉक्टर महिपाल सिंह, फार्मासिस्ट शंभू गुप्ता, श्री राम तिवारी, वार्ड बाय ज्ञान प्रकाश गुप्ता, स्टाफ नर्स अमिता सिंह, रामकेवल सहित अस्पताल के कर्मचारी डॉक्टर व क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे ।


पासी जाति का गौरवशाली इतिहास:

पासी उत्तर भारत में निवास करने वाली हिन्दू धर्म के अनुसूचित जाति में सम्मलित है। पासी जाति को पूर्वी उत्तर प्रदेश में पासी और राजवंशी और भार्गव आदि नाम से भी जाना जाता है और यूपी के कुछ भाग में चौकीदार भी कहते है। आजादी के पहले और बाद में भी थाने और पुलिस चौकी में चौकीदारी का काम करते थे। आजादी की लड़ाई में पासी समुदाय का अतुलनीय योगदान है ।Stikarआजादी की लड़ाई में पासी समुदाय का अतुलनीय योगदान है पासी जाति के लोग कद काठी से बलवान और निडर होना इनका स्वभाव है। शारीरिक रूप से बलिष्ट और मूछ रखने के बहुत ही शौक़ीन होते है। पासी जाति के लोग शाकाहारी और मांशाहारी दोनों होते है।Maharaja bijli pasi  मुख्यरूप से किसानी का काम करते है उत्तर प्रदेश में पासी अनुसूचित जाति के अंतर्गत आते हैं इन्हें कुछ जगह इन्हें रावत कहते है इनको निम्न श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है कुछ राज्यों में इन्हे एससी श्रेणी में रखा गया है। भरपासी ,कैथवास पासी, रावतपासी, गूजरपासी इनकी मुख्य उपजाती है। पासी का काम श्रम करना है ,इन्हें भर भी कहते हैं ।पासी लोग उत्तर भारतीय राज्यों पंजाब बिहार और उत्तर प्रदेश अरूणाचल प्रदेश में निवास करते हैं। अंग्रेजो ने पासी राजवंश के वंशजो को दबाने के लिए एक्ट ले कर आये और जबरन जेल में बंद कर दिया गया और इतिहास के लेखकों ने इतिहास के पन्ने से पासी लोगो का इतिहास मिटा दिया। पासी समुदाय उत्तर भारत के तराई क्षेत्र में कई सौ साल पहले राजवंश की स्थापना की थी और लगभग 3 सौ साल तक राज्य किया था लखनऊ में पासी राजाओं के कई किले आज भी खँडहर के रूप में है लखनऊ को बसाने का श्रेय भी पासी राजाओं का है। वर्तमान का सीतापुर जिला छीता पासी की विरासत है।


यूपी सरकार 2022 में पासी समाज के चुने हुये विधायक : पासी जाति से  विधायक चुनकर पहुंचे सदन 27

1-MLA : Hon’ble Smt. Manju Tyagi Shri Nagar Distt. Lakhimpur Kheri UP

2- MLA : Hon’ble Shri.BabuRam Paswan  Puranpur Distt. Pilibhit UP

3- MLA : Hon’ble Shri. Ram Krishan Bhargav  Mishrikh Distt. Sitapur UP

4- MLA : Hon’ble Shri. Dr Vimlesh Paswan  Bas Gaon  Distt. Gorakhpur UP

5- MLA : Hon’ble Shri. Shyam Dhani Rahi Kapil vastu Distt. Sidharth Nagar UP

6- MLA : Hon’ble Shri. Suresh Rahi Hargaon Distt. Sitapur UP

7-MLA : Hon’ble Shri. Vinod saroj  Babaganj Distt. Pratapgarh U


 


महाराजा बिजली पासी: Maharaja Bijli Pasi:महाराजा बिजली पासी लखनऊ के पास अवध प्रांत के बिजनौर गढ़ के राजा थे जो 12वीं सदी के अंत तक अवध के एक बड़े भू-भाग पर स्थापित था।और महान गौवरौता के साथ शासन किया। इनके पिता नथावन देव तथा माता बिजना थीं। बिजनौर नामक शहर को महाराजा बिजली पासी ने ही बसाया था। एक वीर योद्धा के रूप में दो बार राजा जयचंद को हराया था। महाराजा राजा बिजली ने सर्वप्रथम अपनी माता की स्मृति में बिजनागढ की स्थापना की थी जो कालांतर में बिजनौरगढ़ एवं वर्तमान में बिजनौर के नाम से संबोधित किया जाने लगा। इसके बाद उन्होंने अपनी पिता की याद में बिजनौर गढ़ से उत्तर तीन किलोमीटर की दूरी पर पिता नाथावन के नाम पर नथवागढ़ की स्थापना की। महाराजा राजा बिजली ने किसी की अधीनता स्वीकार नहीं की बल्कि दो बार राजा जयचंद की सेना को पराजित भी किया था।

Sacchidanand
लेखक : सच्चिदानंद राजवंशी एड0

महाराजा बिजली पासी, पासी समुदाय के एक महान भारतीय राजा थे, वे उत्तरी भारत में एक राजा के रूप में लोकप्रिय थे। बिजली पासी ने वर्तमान उत्तर प्रदेश राज्य के एक हिस्से पर शासन किया।
बिजली पासी के अस्तित्व या जीवन के संबंध में ऐतिहासिक साक्ष्य स्पष्ट हैं। 2000 में, डाक विभाग,Stikar भारत सरकार, रामविलास पासवान (पिछले पोस्ट मंत्री) के प्रभार के तहत, सामाजिक सम्मान के लिए एक स्मारक डाक टिकट जारी किया और पासी जाति के आंदोलन का राजनीतिक प्रभाव। इस स्मारक स्टाम्प में, उत्तर प्रदेश में बिजनौर शहर की स्थापना का श्रेय बिज़ली पासी को दिया गया। उन्हें पृथ्वीराज चौहान के समकालीन होने के रूप में भी वर्णित किया गया था। इस विशेष मोहर के अनुसार, उन्होंने उस समय अपनी स्थिति मजबूत कर ली जब उत्तर भारत को अतीत के शक्तिशाली साम्राज्य के पतन से पहले कई छोटे राज्यों में विभाजित किया गया था।
महाराजा बिजली पासी एक प्रबुद्ध शासक थे जिन्होंने अपनी स्थिति को मजबूत किया और बिजनौर के क्षेत्र में भूमि के एक बड़े पथ पर अपना शासन स्थापित किया। जैसा कि अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी के ब्रिटिश गजेटियर में दर्ज किया गया था, वह पृथ्वीराज चौहान के समकालीन थे। वह “पासिस” का एक सक्षम नेता था, जो इलाके के स्वदेशी लोगों की एक भयंकर स्वतंत्रता थी।Stikar बिजली पासी के स्मरणोत्सव ने दलित के दावों को आवाज़ दी कि अतीत में दलित राजा थे और उनका उच्च जातियों की तरह ही शानदार इतिहास था। महाराजा की योद्धा छवि, जो अक्सर कांशी राम, बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक के सुझाव के अनुसार विभिन्न दलित समुदायों (विशेष रूप से पासी जाति के लोगों) की दीवारों पर देखी गई थी। वह चाहते थे कि छवि में पांच सिख गुरुओं को शामिल किया जाए, जिन्हें आज भी दलित समुदायों द्वारा पूजा जाता है। उन गुरुओं की विशिष्ट विशेषता महाराजा की छवि में दिखाई देती है, सावधान परीक्षा पर।

महाराजा बिजली पासी किला
महाराजा बिजली पासी किला लखनऊ का एक और ऐतिहासिक स्थल है जो देखने लायक है।हर वर्ष महाराजा बिजली पासी के जन्मदिन पर लाखों पासी लखनऊ के अन्य ऐतिहासिक आकर्षणों की तुलना में, महाराज बीजली पासी किला कम प्रसिद्ध है। आशियाना के आवासीय क्षेत्र में स्थित, लखनऊ का यह पर्यटन स्थल है।

पासी जाति की उपजातियां:
01-कैथवास: काशी प्रांत में रहने वाले पासियों को कैथवास कहा गया है।

02-गूजर: गुर्ज का मतलब गदा होता है जो लोग युद्ध में गदा प्रयोग करते थे उन्हें गुर्जर या गूजर कहा गया है।

03-कमानिया: जो लोग कमान (धनुष बाण) धारण करते थे, और युद्ध में प्रयोग करते थे।

04-त्रिशूलिया: जो पासी त्रिशूल को शस्त्र के रूप में प्रयोग करते थे।

05-तरमाली: वह पासी जाति जो ताड़ व खजूर से ताड़ी निकालते थे, यही उनका व्यवसाय था।

06-राजपासी या राजवंशी: यह अधिकांश राज्यों के राजा हुआ करते थे।07-बौरिया या बौरासी: जो युद्धों में तलवार चलाते चलाते उन्मक्त अर्थात मदमस्त हो जाते थे। 08-खटिक: पासी समाज के ही अंग हैं जो खड्ग (तलवार) चलाया करते थे।09-भुरजा :यह भर पासी थे, उड़ीसा में जाने पर भुरजा हो गये।

10-भर पासी: भाला धारण करने वाले भल या भर पासी कहे जाते थे, सन् 1900 के पूर्व भर लोग पिछड़े वर्ग में शामिल कर दिये गए थे।

11-अहेरिया: जंगलों में आखेट (शिकार) करने वाले पासी जाति। 12-बहेलिया अथवा व्याधपासी:13 – पासवान : यह सभी पासी जाति में आते हैं, इनकी जनसंख्या आजमगढ़ जिले में अधिक है

बौरिया रायबरेली एवं उन्नाव जिले में अधिक हैं नेपाल, असम,बंगाल तथा बिहार में भी करोड़ों की संख्या में पासी हैं असम का पासी घाट बहुत ही प्रसिद्ध स्थान है। अरूणाचल में पासी धनाढ्य है। आंध्रप्रदेश तथा कर्नाटक के पासी अपने को किंग पासी कहते हैं। 800 वर्ष पहले भारतवर्ष में कई प्रदेशों में पासी राजाओं का शासन था। उत्तर प्रदेश में तो सैकड़ों छोटे बड़े राजा महाराजा 12वीं शताब्दी तक थे। और बहराइच के राजा त्रिलोक चंद ने दिल्ली के राजा विक्रमपाल को हरा कर सारे अवध पर राज्य स्थापित कर लिया था। पहली शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक अवध प्रान्त में पासियों का साम्राज्य रहा है।


उत्तर प्रदेश में पासी जाति के नाम पर राजनीति में लगी है होड़। सभी राजनितिक दल अपने अपने तरीके से इस बड़े वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की करते है कोशिश। 3 December 2021 को  पड़ोसी जनपद कौशांबी में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शुक्रवार को सिराथू तहसील में संयारा रेलवे ओवरब्रिज का नामकरण महाराजा बिजली पासी पर कर पासवान समाज को साधने का प्रयास किया है।


ललई सिंह यादव का जन्म 01 सितम्बर 1921 को और मृत्यु 07 फरवरी 1993 को हुई वे एक सामाजिक कार्यकर्ता (ऐक्टिविस्ट) थे जिन्होने सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष किया और सामाजिक न्याय के अपने लक्ष्य के लिए अनेक पुस्तकों की रचना सच्ची रामायण का अनुवाद हिंदी में किया जो अत्यन्त विवादित रहीं। अपनी इस पुस्तक के लिए सुप्रीम कोर्ट तक की लड़ाई लड़ी अंत में जीत ललई सिंह यादव को मिली इस लिए उन्हें उत्तर भारत का “पेरियार” कहा जाता है।


सामाजिक कुरूतियों को जड़ से उखाड़ फेकने वाले नायक , दक्षिण भारत के समाज सुधार आन्दोलन के पिता, अज्ञानता के नाशक , अंधविश्वास का चुरा बनाने वाले महानायक और हिन्दू समाज में फैली रीति-रिवाज़ के नाम पर सामाजिक बुराइयों का दमन करने वाले ई वी पेरियार रामास्वामी नायकर को सत सत नमन और विनम्र भावपूर्ण श्रद्धांजलि। 24 दिसंबर 1973को 93 वर्ष की आयु में उनको महा परिनिर्वाण प्राप्त हुआ। उनके महान कार्यों को नमन ऐसे पराक्रमी,कर्मयोगी ,महा पुरुष का जन्म युगो युगो बाद होता है। एडवोकेट मुकेश भारती सिविल कोर्ट लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश।


पेरियार कौन थे ? who was periar ?Stikar

Answar: इरोड वेंकट नायकर रामासामी (17 सितम्बर, 1879-24 दिसम्बर, 1973) जिन्हे पेरियार (तमिल में अर्थ -सम्मानित व्यक्ति) नाम से भी जाना जाता था,पेरियार साहेब वैज्ञानिक दृष्टिकोण के व्यक्ति थे और तर्कशील थे। 20वीं सदी के तमिलनाडु के एक प्रमुख राजनेता व दलित शोषित, गरीबों के मसीहा थे।और बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर के समकालीन थे। अपने सिद्धांतो से समाज में फैली बुराइयों का नाश किया। इन्होंने जस्टिस पार्टी का गठन किया जिसका सिद्धान्त जातिवादी व गैर बराबरी वाले हिन्दुत्व का विरोध था। पेरियार अपनी मान्यता का पालन करते हुए मृत्युपर्यंत जाति और हिंदू-धर्म से उत्पन्न असमानता और अन्याय का विरोध करते रहे। ऐसा करते हुए उन्होंने लंबा, सार्थक, सक्रिय और सोद्देश्यपूर्ण जीवन जीया था।
काशी विश्वनाथ की यात्रा और और ज्ञान की प्राप्ति व परिणामStikar
सन 1904 में पेरियार कुछ दिनों के लिए घर छोड़ कर काशी घूमने गए। बड़ी कठिनाइयों के साथ भारत यात्रा करते हुए काशी पहुंचे थे। महीनो का समय लगा था काशी विश्वनाथ की यात्रा में। ब्राह्मणों ने उनका घोर अपमान किया उन्हे इस बात का बहुत दुःख हुआ और उन्होने हिन्दुत्व के विरोध की ठान ली। इसके लिए उन्होने किसी और धर्म को नहीं स्वीकारा और वे हमेशा नास्तिक रहे। इसके बाद उन्होने एक मन्दिर के न्यासी का पदभार संभाला तथा जल्द ही वे अपने शहर के नगरपालिका के प्रमुख बन गए। चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के अनुरोध पर 1919 में उन्होने कांग्रेस की सदस्यता ली। इसके कुछ दिनों के भीतर ही वे तमिलनाडु इकाई के प्रमुख भी बन गए। केरल के कांग्रेस नेताओं के निवेदन पर उन्होने वाईकॉम आन्दोलन का नेतृत्व भी स्वीकार किया जो मन्दिरों कि ओर जाने वाली सड़कों पर दलितों के चलने की मनाही को हटाने के लिए संघर्षरत था। उनकी पत्नी तथा दोस्तों ने भी इस आंदोलन में उनका साथ दिया। एडवोकेट मुकेश भारती सिविल कोर्ट लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश।


जानें- क्यों ‘सच्ची रामायण’ का विवाद क्या है। sachchi ramayan dispute….?

पेरियार ई.वी. रामासामी:ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ अपने समय के महानतम चिंतक और विचारकों में से एक थे । वे तर्कवादी के साथ साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले व्यक्ति थे । मानवीय विवेक पर भरोसा करते थे। किसी भी किस्म की अंधश्रद्धा, कूपमंडूकता, जड़ता, अतार्किकता और विवेकहीनता उन्होंने अपने जीवन में स्वीकार नहीं किया । वर्चस्व, अन्याय, असमानता, पराधीनता और अज्ञानता के हर रूप को वे चुनौती दिया । उनकी विशिष्ट तर्कपद्धति, तेवर और अभिव्यक्ति शैली के चलते जून 1970 में यूनेस्को ने उन्हें ‘आधुनिक युग का मसीहा’, ‘दक्षिण-पूर्वी एशिया का सुकरात’, ‘समाज सुधारवादी आंदोलनों का पितामह’ तथा ‘अज्ञानता, अंधविश्वास, रूढ़िवाद और निरर्थक रीति-रिवाजों का कट्टर दुश्मन’ स्वीकार किया है। उन्हें वाल्तेयर की श्रेणी का दार्शनिक, चिंतक, लेखक और वक्ता माना जाता।‘सच्ची रामायण’ उनकी एक चर्चित कृति है।Stikar

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Mukesh Bharti: Chief Editor-बहुजन इंडिया 24 न्यूज़

दक्षिण भारत के सुकरात “पेरियार साहेब “ रामायण को धार्मिक किताब नहीं मानते थे। उनका कहना था कि यह एक राजनीतिक पुस्तक है और कपोल कल्पित है। जिसे ब्राह्मणों ने दक्षिणवासी अनार्यों पर उत्तर के आर्यों की विजय और प्रभुत्व को जायज ठहराने के लिए लिखा गया है और गैर बराबरी की नीव इस किताब के माध्यम भारत में डाली गयी इस किताब के माधयम से लोगो में भ्रम फैलाया गया । ब्राह्मणों का गैर-ब्राह्मणों पर और मूलनिवासी महिलाओं व पुरुषों पर ब्राह्मण के वर्चस्व स्थापित करने का साधन मात्र है । पेरियार साहेब ने अपने मिशन को जिन्दा रखने के लिए ” सच्ची रामायण” की रचना की जिससे आने वाली पीढ़ियां सबक ले सके। रामायण की मूल अंतर्वस्तु को उजागर करने के लिए पेरियार ने ‘वाल्मीकि रामायण’ के ब्राह्मणों द्वारा किए गए अनुवादों सहित; अन्य राम कथाओं, जैसे- ‘कंब रामायण’, ‘तुलसीदास की रामायण’ (रामचरित मानस), ‘बौद्ध रामायण’, ‘जैन रामायण’ आदि के अनुवादों तथा उनसे संबंधित ग्रंथों का सम्यक अध्ययन किया था। इसके साथ ही उन्होंने रामायण के बारे में विद्वान अध्येताओं और इतिहासकारों की टिप्पणियों का भी गहन अध्ययन किया। उन्होंने करीब चालीस वर्षों तक अध्ययन करने के बाद तमिल भाषा में लिखी पुस्तक ‘रामायण पादीरंगल’ में उसका निचोड़ प्रस्तुत किया। यह पुस्तक 1944 में तमिल भाषा में प्रकाशित हुई थी। इसका जिक्र पेरियार की पत्रिका ‘कुदी अरासू’ (गणतंत्र) के 16 दिसंबर 1944 के अंक में किया गया है। इसका अंग्रेजी अनुवाद द्रविड़ कषगम पब्लिकेशन्स ने ‘द रामायण : अ ट्रू रीडिंग’ नाम से 1959 में प्रकाशित किया गया। इसका हिंदी अनुवाद 1968 में ‘सच्ची रामायण’ नाम से किया गया। हिंदी अनुवाद के प्रकाशक ललई सिंह यादव और अनुवादक राम आधार थे। ललई सिंह यादव उत्तर प्रदेश-बिहार के प्रसिद्ध मानवतावादी संगठन ‘अर्जक संघ’ से जुड़े लोकप्रिय सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता थे।Bahujan Press

9 दिसंबर, 1969 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘सच्ची रामायण’ पर प्रतिबंध लगा दिया। इसी के साथ पुस्तक की सभी प्रतियों को जब्त कर लिया गया। उत्तर भारत के पेरियार नाम से चर्चित हुए प्रकाशक ललई सिंह यादव ने जब्ती के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। वे हाईकोर्ट में मुकदमा जीत गए। सरकार ने हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

सुप्रीम कोर्ट में इस ऐतिहासिक मामले की सुनवाई तीन जजों की खंडपीठ ने की। खंडपीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर; तथा दो अन्य न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और सैयद मुर्तज़ा फ़ज़ल अली थे। 16 सितंबर 1976 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सर्वसम्मति से फैसला देते हुए राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में निर्णय सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ललई सिंह यादव ने हिंदी में ‘सच्ची रामायण’ को प्रकाशित कर एक ऐतिहासिक कार्य को अंजाम दिया।


stikar kabir ki vani

“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।”

अर्थ – कबीर दास जी के दोहे से समझ में आता है कि संसार की बड़ी-बड़ी पुस्तकें पढ़कर कितने ही लोग मृत्यु के द्वार तक पहुंच गए, मगर वे सभी विद्वान नहीं हो सके थे। वे कहते हैं कि इतन पढ़ने के बजाय अगर कोई प्रेम या प्रेम के ढाई अक्षर ही पढ़ ले यानी कि प्रेम के वास्तविक रूप को पहचान ले तो वह सच्चा ज्ञानी माना जाएगा


तुरंत ब्लड शुगर लेवल के स्तर को कैसे कम करें? Sugar Level Kam Karne ka  Gharelu Upay

पहला उपाय : ये है कि जिस मरीज का ब्लड शुगर लेवल बड़ा हुआ है उसके लिए ब्लड शुगर लेवल के स्तर को कम करने लिए सुबह उठकर खाली पेट दो से तीन तुलसी की पत्ती चबाएं,या फिर आप चाहें तो तुलसी का रस भी पी सकते हैं । इससे आपका ब्लड शुगर नियंत्रण में आ जाएगा । तुलसी के सेवन के साथ में यदि आप शुगर को कम करने वाली दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो ध्यान रखें और डॉक्टर्स से परामर्श जरूर लें । क्योंकि शुगर को तेजी से कम करने का काम करती है ।

Gharelu Upchar

दूसरा उपाय: ये है कि जिस मरीज का ब्लड शुगर लेवल बड़ा हुआ है उसके लिए ब्लड शुगर लेवल के स्तर को कम करने का सबसे आसान तरीका है पानी। इस दौरान अगर आप पानी पीते हैं तो यह आपके रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। आपको बता दें कि पानी के जरिए किडनी टॉक्सिन्स और इंसुलिन को शरीर से बाहर निकालने का काम करता है।

Dr Ajay Annat Chaudhry
डॉ अजय अनंत चौधरी

Stikar
शुगर को कम करने के लिए क्या खाना चाहिए ?
डायबिटीज में अरहर की दाल, काबुली चने, हरे चने, कुलथी की दाल का सेवन अधिक करना चाहिए. डायबिटीज में कौन-से फल खाने चाहिए? शुगर के मरीज सेब, संतरा, आड़ू, बेरीज, चेरी, एप्रिकोट, नाशपाती और कीवी जैसे फल हर दिन खा सकते हैं. आप बिना गुड़ के उबाली हुई शकरकंद का सेवन भी कर सकते हैं. डॉ अजय अनंत चौधरी Dt.21-12-2022


मधुमेह के लिए प्राकृतिक घरेलू उपचार का अवलोकन।
मधुमेह रोग (Diabetes) एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति के रक्त शर्करा ( blood sugar ) का स्तर सामान्य शर्करा के स्तर से ऊपर होता है। हम जो भी खाना खिलते है उसके पाचन के बाद वह ग्लूकोस बन जाता है। यह ग्लूकोस (glucose) खून के ज़रिये विभिन शरीर की कोशिकाओं तक पहुँचता है। और ऊर्जा पैदा होती है। इसलिए खाना खाते ही ग्लूकोस की मात्रा खून मे बढ़ जाती है। ग्लूकोस की मात्रा बढ़ते ही इन्सुलिन (insulin) नाम का हॉर्मोन (hormone) सतर्क हो जाता है और वह इस ग्लूकोस को शरीर की कोशिकायों मे प्रवेश करने मे मदद करता है।Stikar

जब इन्सुलिन की कमी होती है या शरीर इन्सुलिन प्रतिरोधक (insuline resistance) हो जाता है तो ग्लूकोस का कोशिकाओं मे प्रवेश कम हो जाता है। जिस कारण ग्लूकोस की मात्रा खून मे ज़ायदा हो जाती है। इस स्तिति को डायबिटीज या मधुमेह कहते है।Gharelu Upchar

डायबिटीज को नियंत्रण करने के लिए ऐसा खाना, खाना चाहिए जो आप के ग्लूकोस की मात्रा को ज़ायदा नहीं बढ़ाये या अचानक तेज़ी से ग्लूकोस के स्तर को असंतुलित कर दे। डायबिटीज के मरीज़ों को इसलिए अपने खान पान पर बहुत धयान देना चाहिए।
घर पर प्राकृतिक रूप से मधुमेह का इलाज कैसे करें, इसका सरल उपाय है कि हमें अपने द्वारा खाए जाने वाले भोजन को भली भांति समझना चाहिए। कुछ खाद्य पदार्थ रक्त शर्करा के स्तर को तेजी से बढ़ाते हैं। ये उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स (High Glycemic index) वाले खाद्य पदार्थ कहलाते हैं। जबकि कुछ खाद्य उत्पाद बहुत धीरे-धीरे ग्लूकोज छोड़ने के लिए जाने जाते हैं। ये लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (low glycemic index) वाले खाद्य पदार्थ कहलाते हैं। इस प्रकार, निम्न और उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का उचित चयन ग्लूकोस के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।डॉ अजय अनंत चौधरी Dt.21-12-2022


संविधान के अनुच्छेद

अनुच्छेद  14 से 18 समानता का अधिकार:

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 17 और 18 के तहत समानता का अधिकार दिया गया है। ये लेख नागरिकों को कानून के समक्ष समान व्यवहार और कानून की समान सुरक्षा, सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर सुनिश्चित करते हैं और भेदभाव और अस्पृश्यता को रोकते हैं जो सामाजिक बुराइयाँ हैंStikar samvidhan

अनुच्छेद 14 से 18 समानता का अधिकार:
अनुच्छेद 14 के अनुसार : भारत राज्य क्षेत्र में राज्य के किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता और विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं किया जाएगा इस अनुच्छेद में की दो बातें निहित है। यह अनुच्छेद बहुत व्यापक दृश्टिकोण के लिए संविधान में सम्मलित किया गया है।
विधि के समक्ष समानता : विधि के समक्ष समानता यह ब्रिटिश संविधान से ग्रसित किया गया है यह अनुच्छेद कानून समानता का नकारात्मक दृष्टिकोण है इसमें निम्न तीन अर्थ निकलता है।

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1 – देश में कानून का राज: देश में सभी व्यक्ति चाहे वे जिस जाति धर्म व भाषा के हो सभी एक समान कानून के अधीन हैं कोई भी व्यक्ति कानून के ऊपर नहीं है।

2 विधियों का समान संरक्षण: विधियों के समान संरक्षण यह अमेरिका संविधान से ग्रसित किया गया इसका अर्थ यह है कि समय परिस्थिति वाले व्यक्तियों को कानून के समक्ष सामान समझा जाएगा क्योंकि समानता का अधिकार का मतलब सब की समानता ना होकर सामान रूप में समानता है अर्थात एक ही प्रकार की योग्यता रखने वाले व्यक्तियों के साथ जाति धर्म भाषा व लिंग के आधार पर कोई भेदभाव ना किया जाए।
3-विधानी वर्गीकरण : भारतीय संविधान की विधानी वर्गीकरण के सिद्धांत का प्रतिपादन करता है जो अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं करता है विधानी वर्गीकरण का अर्थ है कि यदि एक व्यक्ति की अपनी आवश्यकता है परिस्थितियों के अनुसार अन्य से भिन्न है तो उसे एक वर्ग माना जाएगा और समानता का सिद्धांत उस पर अकेले लागू होगा लेकिन इसका आधार वैज्ञानिक तर्कसंगत या युक्त होना चाहिए।
इसमें नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत निहित है। यह अनुच्छेद भारतीय संविधान का मूल ढांचा है। इसमें विधि के शासन का उल्लेख है। इसमें सर्वग्राही समानता का सिद्धांत पाया जाता है।

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