प्राकृतिक खेती की नई शुरुआत गोमूत्र तथा गाय के गोबर से “जीवामृत”बना कर जैविक *कीटनाशक घर पर करें तैयार। – बहुजन इंडिया 24 न्यूज

प्राकृतिक खेती की नई शुरुआत गोमूत्र तथा गाय के गोबर से “जीवामृत”बना कर जैविक *कीटनाशक घर पर करें तैयार।

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बहुजन इंडिया 24 न्यूज व बहुजन प्रेरणा दैनिक हिंदी समाचार पत्र ( सम्पादक मुकेश भारती ) 9161507983

सिद्धार्थ नगर : (मुकेश गौतम – ब्यूरो रिपोर्ट)


प्राकृतिक खेती की नई शुरुआत गोमूत्र तथा गाय के गोबर से “जीवामृत”बना कर जैविक *कीटनाशक घर पर करें तैयार।

मुकेश गौतम सिद्धार्थ नगर (डुमरियागंज)

।कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में प्राकृतिक खेती की नई शुरूआत की गयी है।किसान गाय के गोबर और गोमूत्र से बनने वाला यह “जीवामृत” पोषक तत्वों से भरपूर और जैविक कीटनाशक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस नई शुरुआत से अब बिना किसी रासायनिक खाद के और बिना किसी रासायनिक दवाओं की पोषक तत्वों से भरपूर फसलों एवं सब्जियों का उत्पादन किया जा सकता है।वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ एल सी वर्मा ने बनाने की विधि की जानकारी देते हुए बताया कि सबसे पहले गाय के मूत्र 5 लीटर को एक कंटेनर में रखें तथा इसमें गाय का गोबर 10 किलोग्राम मिला दें | गोबर को मूत्र में इस तरह से मिलायें की मूत्र के साथ घुल जाय किसी भी तरह का कोई गाँठ नहीं रहे | इसके बाद 500 ग्राम गुड, 500 ग्राम बेसन, एक किलोग्राम बरगद के वृक्ष के नीचे की मिट्टी को बर्तन में पानी के साथ घोल लें | (गुड का प्रयोग इस लिए करते हैं की तैयार मिश्रण में उपस्थित बैक्ट्रिया ज्यादा एक्टिव हो जाता है) । गुड को भी इस तरह घोले की किसी भी तरह का कोई ढेला नहीं रह पाये । अब घुले हुये गुड को गोबर युक्त मूत्र में मिला दें । इन दोनों मिश्रण को अच्छी तरह से चलायें । कुछ देर तक मिश्रण को चलाते रहें । जब मिश्रण अच्छी तरह से मिल जाए तो एक बड़े से कंटेनर में डाल दें और कुछ देर तक एक लकड़ी से चलते रहें । इसके बाद उसमें उतना ही पानी मिला दें । इसी तरह सभी मिश्रण को 7 दिन तक छोड़ दें लेकिन सातों दिन समय – समय पर एक लकड़ी से चलाते रहें । सात दिन के बाद आप इसे पौधों पर उपयोग कर सकते हैं । यह कीटनाशक पौधों पर के फंगी को खत्म कर देता है । इस तरह से आप अपने खेती का लागत कम कर सकते हैं । आज के इस जैविक खेती कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ डीपी सिंह, डॉ मार्कंडेय सिंह, मौसम विशेषज्ञ सूर्य प्रकाश सिंह, मौसम पर्यवेक्षक अर्जुन सिंह यादव, काला नमक धान के वैज्ञानिक प्रेमचंद्र चौरसिया आदि उपस्थित रहे।

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