अंन्त करण शुद्ध होंने पर भगवान का आविर्भाव होता है – कृष्णा सुजाता प्रणामी
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संवाददाता : : मैनपुरी : : अवनीश : : अंन्त करण शुद्ध होंने पर भगवान का आविर्भाव होता है – कृष्णा सुजाता प्रणामी
अंन्त करण शुद्ध होंने पर भगवान का आविर्भाव होता है – कृष्णा सुजाता प्रणामी बिछवां/मैनपुरी- क्षेत्र के गाँव अंजनी में संकट मोचन पावन धाम अंजनी मंदिर पर चल रही श्रीमदभागवत कथा मे सातवे दिन कथावाचक कृष्णा सुजाता प्रणामी ने भगवान के प्राकटय के बारे में बताते हुए कहा कि अंन्तःकरण शुद्ध होंने पर उसमें भगवान का आविर्भाव होता है । उन्होंने बताया कि श्रीक्रष्णावतार के अवसर पर भी ठीक उसी प्रकार का समष्टि की शुद्धि का वर्णन किया गया । इसमें काल , दिशा , प्रथ्वी , जल ,वायु , आकाश , मन और आत्मा इन नौ द्रव्यों का अलग अलग नामोंल्लेख करके साधक के लिए एक अत्यंन्त उपयोगी साधना पद्धति की ओर संकेत किया गया है । उन्होंने काल का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान काल से परे है । शास्त्रों और सत्पुरुषों के द्बारा ऐसा निरूपण सुनकर काल मानों शुद्ध हो गया था और अद्ररूप धारण करके सबको निगल रहा था । आज जव उसे मालूम हुआ कि स्वंय परिपूर्णता भगवान श्रीकृष्ण मेरे अंदर अवतीर्ण हो रहे है तव वह आंनन्द से भर गया और समस्त सद्गुणों को धारण कर तथा सुहावन वनकर प्रकट हो गया । कथा में प्रवचन देते हुए स्वामी हरिदास महाराज ने कहा कि आडंबर की दुनिया में लोग चकाचौंध की दुनिया में सत्य के मार्ग से विमुख हो जाते हैं साथ ही जिस राह पर चलने से लोक परलोक सुधरेंगे उस राह को छोड़ देते हैं सांसारिक सुविधाओं का भोग करने के लिए कर्म को बिगाड़ लेते हैं साथ ही गलत धन का उपयोग करते हैं मनुष्य का जन्म भगवान की भक्ति व मुक्ति के लिए मिला है लेकिन मनुष्य जब तक गर्भ के अंदर रहता है प्रभु से प्रार्थना करता है कि हमें मुक्ति दिलाओ बाहर जाकर हम ईश्वर की भक्ति करेंगे लेकिन इस माया रुपी संसार में आने के बाद सब कुछ भूल जाता है और अंत समय में उसे भक्ति की याद आती है समय रहते मनुष्य को दान यात्रा के साथ धार्मिक कार्यों में रुचि लगानी चाहिए कथा में विभिन्न प्रसंगों पर मार्मिक ढंग से प्रस्तुति की गई साथ ही कंस वध के साथ ही द्वारिका इस नगरी के साथ सुदामा चरित्र का वर्णन किया गया।
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