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28 September Bhagat Singh Jayanti 2022 ::शहीद भगत सिंह की 115वीं जयंती

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संवाददाता : :लखीमपुर खीरी : : संदीपा राय   :: 28 september Bhagat Singh Jayanti 2022: : शहीद भगत सिंह की 115वीं जयंती

आज देश शहीद भगत सिंह की जयंती मना रहा है. आज भगत सिंह की 115वीं जयंती है गुलाम भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए कई भारतीय क्रांतिकारी शहीद हो गए। इनमें भगत सिंह का नाम प्रमुख है। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 में हुआ था। देश को आजादी दिलाने के लिए भगत सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। अंग्रेज अधिकारियों से टक्कर लेने वाले भगत सिंह को सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था। जेल में अंग्रेजी हुकूमत की प्रताड़ना झेलने के बाद भी भगत सिंह ने आजादी का मांग को जारी रखा।

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आज देश शहीद भगत सिंह की जयंती मना रहा है. आज भगत सिंह की 115वीं जयंती है गुलाम भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए कई भारतीय क्रांतिकारी शहीद हो गए। इनमें भगत सिंह का नाम प्रमुख है। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 में हुआ था। देश को आजादी दिलाने के लिए भगत सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। अंग्रेज अधिकारियों से टक्कर लेने वाले भगत सिंह को सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था। जेल में अंग्रेजी हुकूमत की प्रताड़ना झेलने के बाद भी भगत सिंह ने आजादी का मांग को जारी रखा। कोर्ट में केस के दौरान उन्हें मौका मिला कि वह देशभर में आजादी की आवाज को पहुंचा सकें। उन्हें अंग्रेजों ने फांसी की सजा सुनाई थी और तय तारीख से एक दिन पहले यानी 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी थी। आज शहीद क्रांतिकारी भगत सिंह की जयंती है। भगत सिंह की जयंती के मौके पर जानें उनके जीवन से जुड़ी ऐसी पांच रोचक बातें, जो हर देश प्रेमी को पता होनी चाहिए। सेंट्रल असेंबली में बम धमाका भगत सिंह आजादी की लड़ाई तो लड़ रहे थे लेकिन उन दिनों सोशल मीडिया जैसे माध्यम नहीं थे, जो उनकी आवाज को देशभर में फैला सकें। अंग्रेजों को अपनी मांगों के बारे में बताने के लिए और पूरे देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपनी आवाज पहुंचाने के लिए भगत सिंह ने एक धमाका किया। यह धमाका 8 अप्रैल को सेंट्रल असेंबली में हुआ। इसमें कोई घायल नहीं हुआ लेकिन देशभर के समाचार पत्रों में इस धमाके की गूंज जरूर सुनाई दी। इसके बाद भगत सिंह और उनके साथ बटुकेश्वर दत्त को बम फेंकने के लिए गिरफ्तार करके दो साल की जेल की सजा सुनाई गई। गुलाम भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए कई भारतीय क्रांतिकारी शहीद हो गए। इनमें भगत सिंह का नाम प्रमुख है। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 में हुआ था। देश को आजादी दिलाने के लिए भगत सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। अंग्रेज अधिकारियों से टक्कर लेने वाले भगत सिंह को सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था। जेल में अंग्रेजी हुकूमत की प्रताड़ना झेलने के बाद भी भगत सिंह ने आजादी का मांग को जारी रखा। कोर्ट में केस के दौरान उन्हें मौका मिला कि वह देशभर में आजादी की आवाज को पहुंचा सकें। उन्हें अंग्रेजों ने फांसी की सजा सुनाई थी और तय तारीख से एक दिन पहले यानी 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी थी। आज शहीद क्रांतिकारी भगत सिंह की जयंती है। भगत सिंह की जयंती के मौके पर जानें उनके जीवन से जुड़ी ऐसी पांच रोचक बातें, जो हर देश प्रेमी को पता होनी चाहिए।भगत सिंह जयंती सेंट्रल असेंबली में बम धमाका भगत सिंह आजादी की लड़ाई तो लड़ रहे थे लेकिन उन दिनों सोशल मीडिया जैसे माध्यम नहीं थे, जो उनकी आवाज को देशभर में फैला सकें। अंग्रेजों को अपनी मांगों के बारे में बताने के लिए और पूरे देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपनी आवाज पहुंचाने के लिए भगत सिंह ने एक धमाका किया। यह धमाका 8 अप्रैल को सेंट्रल असेंबली में हुआ। इसमें कोई घायल नहीं हुआ लेकिन देशभर के समाचार पत्रों में इस धमाके की गूंज जरूर सुनाई दी। इसके बाद भगत सिंह और उनके साथ बटुकेश्वर दत्त को बम फेंकने के लिए गिरफ्तार करके दो साल की जेल की सजा सुनाई गई।भगत सिंह जयंती -सजा के दौरान आंदोलन भगत सिंह जेल की सलाखों के पीछे जरूर बंद थे लेकिन यहां से भी उनका आंदोलन जारी रहा। वह लेख लिखकर अपने विचार व्यक्त करते थे। हिंदी, पंजाबी, उर्दू, बंग्ला और अंग्रेजी के तो वह जानकार थे ही। इसी का लाभ उठाकर उन्होंने देशभर में अपना संदेश पहुंचाने का प्रयास जारी रखा। अदालत की कार्यवाही के दौरान पत्रकार जब कोर्ट में होते, तो भगत सिंह आजादी की मांग को लेकर ऐसी जोशीली बाते कहते, जो अगले दिन अखबारों के पहले पन्ने पर नजर आतीं और हर नागरिक का खून आजादी के लिए खौल उठता।फांसी की सजा दो साल की कैद में भगत सिंह के साथ ही राजगुरु और सुखदेव को भी अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। तीनों क्रांतिकारियों को 24 मार्च 1931 को फांसी दी जानी थी लेकिन इस खबर के बाद से देशवासी भड़के हुए थे। लोग तीनों सपूतों की फांसी की विरोध कर रहे थे। भारतीयों में आक्रोश था और अंग्रेजों के खिलाफ जिस विरोध को भगत सिंह भारतीयों की नजरों में देखना चाहते थे, वह अब अंग्रेजों को डराने लगा था।भगत सिंह से डरी अंग्रेजी हुकूमत अंग्रेजी हुकूमत भरत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की फांसी को लेकर हो रहे विरोध से डर गई थी। वह भारतीयों के आक्रोश का सामना नहीं कर पा रही थी। ऐसे में माहौल बिगड़ने के डर से अंग्रेजों ने भगत सिंह की फांसी का समय और दिन ही बदल दिया। गुपचुप तरीके से तय समय से एक दिन पहले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई। 23 मार्च 1931 को शाम साढ़े सात बजे तीनों वीर सपूतों को फांसी की सजा हुई। इस दौरान कोई भी मजिस्ट्रेट निगरानी करने को तैयार नहीं था। शहादत से पहले तक भगत सिंह अंग्रेजों के खिलाफ नारे लगाते रहे।भारत आज दुनिया के विकसित और ताकतवर देशों के साथ एक मंच पर गर्व के साथ खड़ा नजर आता है। भारतीय नेता, उद्योगपति, खिलाड़ी या कोई आम देशवासी हो, सभी को विश्व के अन्य देशों के नागरिकों की तरह ही समान अधिकार मिले हैं। लेकिन आज भारत जिस मुकाम पर है, उसका सबसे बड़ा श्रेय देश की उन वीर शहीदों और क्रांतिकारियों को जाता है, जिन्होंने अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों से भारत को आजादी दिलाई। आजादी का मतलब क्या है, यह हमें इसी मिट्टी में जन्में उन क्रांतिकारियों ने समझाया, जिन्होंने भले ही अपनी जान को हंसते हंसते बलिदान कर दिया लेकिन भारत का गर्व कम नहीं होने दिया। भारत पर कई साल अंग्रेजों ने हुकूमत की। खुद के ही देश में भारतीय अंग्रेजों के नियम कानूनों का पालन करते थे। लेकिन भगत सिंह और तमाम स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी की लौ को आग बना दिया। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला। अंग्रेज भी उनसे डर गए, इसलिए भगत सिंह को तय तारीख से पहले ही गुपचुप तरीके से फांसी दे दी। कहा जाता है कि जब भगत सिंह को फांसी दी जा रही थी, तो भी उनके चेहरे पर मुस्कान और गर्व था। आज उसी शहीद भगत सिंह की जयंती है। 28 सितंबर को जन्मे भगत सिंह के निधन वाले दिन को शहादत दिवस के तौर पर मनाया जाता है। भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों और भाषणों ने गुलाम भारत के युवाओं को आजादी के लिए उकसा दिया और स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में शामिल किया। भगत सिंह की जयंती के मौके पर जानिए उनके ऐसे ही क्रांतिकारी विचारों के बारे में, जो आप में बढ़ा देंगे देशभक्ति की भावना।

 

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