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मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए दावे, आपत्तियां (फॉर्म-6, 6क, 6बी, 7, 8) प्राप्त करने हेतु 27 दिसम्बर तक कायर्क्रम निधार्रित

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संवाददाता ::मैनपुरी::अवनीश कुमार{C016} :: Date ::17 ::12::.2022::
दावे, आपत्तियां (फॉर्म-6, 6क, 6बी, 7, 8) प्राप्त करने हेतु 27 दिसम्बर तक कायर्क्रम निधार्रित है

मैनपुरी – उप जिला निवार्चन अधिकारी राम जी मिश्र ने बताया कि भारत निवार्चन आयोग के निदेर्शानुसार अहर्ता तिथि 01.01.2023 के आधार पर विधानसभा निवार्चन क्षेत्रों की फोटोयुक्त निवार्चक नामावलियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण 2023 के अन्तगर्त दावे, आपत्तियां (फॉर्म-6, 6क, 6बी, 7, 8) प्राप्त करने हेतु दि. 27 दिसम्बर तक कायर्क्रम निधार्रित है।

अवनीश कुमार -ब्यूरो चीफ मैनपुरी

कायर्क्रम के अन्तगर्त मतदाताओं की सुविधा हेतु दि. 18 दिसम्बर (रविवार) एवं दि. 24 दिसम्बर (शनिवार) विशेष अभियान की तिथियां निधार्रित की गयी हैं। उक्त कायर्क्रम के अन्तगर्त मतदाताओं की सुविधा हेतु दि. 18 दिसम्बर रविवार को प्रथम विशेष अभियान तिथि नियत है। जिस पर सभी बीएलओ, पदाभिहीत अधिकारी अपने-अपने मतदान केन्द्र, मतदेय स्थल पर प्रातः 10 बजे से सायं 04 बजे तक उपस्थित रहकर अर्ह मतदाताओं, नागरिकों से आवेदन प्राप्त करेंगे एवं उक्त विशेष अभियान दिवस पर जिला स्तरीय अधिकारियों एवं तहसील स्तरीय अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण भी किया जायेगा।  

          उन्होने जनपद के अहर् नागरिक जो अहर्ता दि. 01.01.2023 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर रहे हैं अथवा किसी कारण से पूवर् में फोटोयुक्त निवार्चक नामावली में नाम सम्मिलित होने से छूट गये हैं अथवा त्रुटिवश नामावली से नाम अपमाजिर्त हुआ है, से कहा है कि अपने से सम्बन्धित मतदान केन्द्र, मतदेय स्थल पर पहुंचकर दावे, आपत्तियां बूथ लेवल आफिसर अथवा पदाभिहीत अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। फॉर्म-6बी स्वैच्छिक आधार नम्बर मतदाता सूची में लिंक कराने के लिए हैं। जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में डबल अंकित हैं। ऐसे मतदाता स्वेच्छा से अपना नाम फॉर्म-7 भरकर अपमाजिर्त करा सकते हैं अन्यथा संज्ञान में आने पर विधिक कायर्वाही की जायेगी, फॉर्म-8 मतदाता सूची की प्रविष्टि में त्रुटि होने पर संशोधन, निवास परिवतर्न, डुप्लीकेट एपिक हेतु भरकर अपने से सम्बन्धित बीएलओ के पास जमा कर सकते हैं। उन्होने पात्र मतदाताओं से अपील करते हुये कहा है कि अपना नाम मतदाता सूची में सम्मिलित कराने हेतु उक्त स्थानों अर्थ http://nvsp.in एवं वोटरहेल्पलाइन ऐप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, फोटोयुक्त निवार्चक नामावली को त्रुटिरहित बनाये जाने में आयोग द्वारा चलाए जा रहे अभियान को सफल बनाने में अपना सक्रिय सहयोग प्रदान करें।


प्रथम विश्व युद्ध

ऑस्ट्रिया के सिंहासन के उत्तराधिकारी आर्चड्युक फर्डिनेंड और उनकी पत्नी का वध इस युद्ध का तात्कालिक कारण था। यह घटना 28 जून 1914, को सेराजेवो में हुई थी। एक माह के बाद ऑस्ट्रिया ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध घोषित किया। रूस, फ़्रांस और ब्रिटेन ने सर्बिया की सहायता की और जर्मनी ने आस्ट्रिया की। Genral Knowledge
साम्राज्यवाद (Imperialism): प्रथम विश्व युद्ध से पहले अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्से कच्चे माल की उपलब्धता के कारण यूरोपीय देशों के बीच विवाद का विषय बने हुए थे। जब जर्मनी और इटली इस उपनिवेशवादी दौड़ में शामिल हुए तो उनके विस्तार के लिये बहुत कम संभावना बची। इसका परिणाम यह हुआ कि इन देशों ने उपनिवेशवादी विस्तार की एक नई नीति अपनाई। यह नीति थी दूसरे राष्ट्रों के उपनिवेशों पर बलपूर्वक अधिकार कर अपनी स्थिति को सुदृढ़ किया जाए। बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा और अधिक साम्राज्यों की इच्छा के कारण यूरोपीय देशों के मध्य टकराव में वृद्धि हुई जिसने समस्त विश्व को प्रथम विश्व युद्ध में धकेलने में मदद की। इसी प्रकार मोरक्को तथा बोस्निया संकट ने भी इंग्लैंड एवं जर्मनी के बीच प्रतिस्पर्द्धा को और बढ़ावा दिया।
अपने प्रभाव क्षेत्र में वृद्धि करने के उद्देश्य से जर्मनी ने जब बर्लिन-बगदाद रेल मार्ग योजना बनाई तो इंग्लैंड के साथ-साथ फ्राँस और रूस ने इसका विरोध किया, जिसके चलते इनके बीच कटुता मेंऔर अधिक वृद्धि हुई।

बहुजन प्रेरणा दैनिक समाचार पत्र व बहुजन इंडिया 24 न्यूज़ (सम्पादक- मुकेश भारती ) किसी भी शिकायत के लिए सम्पर्क करे – 9336114041

Ram Kumar Pal
Ram Kumar Pal Bareilly UP

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सैन्यवाद (Militarism): 20वीं सदी में प्रवेश करते ही विश्व में हथियारों की दौड़ शुरू हो गई थी। वर्ष 1914 तक जर्मनी में सैन्य निर्माण में सबसे अधिक वृद्धि हुई। ग्रेट ब्रिटेन और जर्मनी दोनों ने इस समयावधि में अपनी नौ-सेनाओं में काफी वृद्धि की। सैन्यवाद की दिशा में हुई इस वृद्धि ने युद्ध में शामिल देशों को और आगे बढ़ने में मदद की।
वर्ष 1911 में आंग्ल जर्मन नाविक प्रतिस्पर्द्धा के परिणामस्वरूप ‘अगादिर का संकट’ उत्पन्न हो गया। हालाँकि इसे सुलझाने का प्रयास किया गया परंतु यह प्रयास सफल नहीं हो सका। वर्ष 1912 में जर्मनी में एक विशाल जहाज़ ‘इम्प रेटर’ का निर्माण किया गया जो उस समय का सबसे बड़ा जहाज़ था। इससे इंग्लैंड और जर्मनी के मध्य वैमनस्य एवं प्रतिस्पर्द्धा में वृद्धि हुई।
राष्ट्रवाद (Nationalism): जर्मनी और इटली का एकीकरण भी राष्ट्रवाद के आधार पर ही किया गया था। बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवाद की भावना अधिक प्रबल थी। चूँकि उस समय बाल्कन प्रदेश तुर्की साम्राज्य के अंतर्गत आता था, अतः जब तुर्की साम्राज्य कमज़ोर पड़ने लगा तो इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने स्वतंत्रता की मांग शुरू कर दी।


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बोस्निया और हर्जेगोविना में रहने वाले स्लाविक लोग ऑस्ट्रिया-हंगरी का हिस्सा नहीं बना रहना चाहते थे, बल्कि वे सर्बिया में शामिल होना चाहते थे और बहुत हद तक उनकी इसी इच्छा के परिणामस्वरूप प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई। इस तरह राष्ट्रवाद युद्ध का कारण बना।रूस का मानना था कि स्लाव यदि ऑस्ट्रिया-हंगरी एवं तुर्की से स्वतंत्र हो जाता है तो वह उसके प्रभाव में आ जाएगा, यही कारण रहा कि रूस ने अखिल स्लाव अथवा सर्वस्लाववाद आंदोलन को बल दिया। स्पष्ट है कि इससे रूस और ऑस्ट्रिया–हंगरी के मध्य संबंधों में कटुता आई।इसी तरह के और भी बहुत से उदाहरण रहे जिन्होंने राष्ट्रवाद की भावना को उग्र बनाते हुए संबंधों को तनावपूर्ण स्थिति में ला खड़ा किया। ऐसा ही एक उदाहरण है सर्वजर्मन आंदोलन।



आईपीसी की  धारा 207 में विधि का  क्या प्राविधान है

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विधिक सलाहकार : Mukesh Bharti Advocate

Kanooni salah

IPC की धारा 207 का विवरण :जो कोई किसी सम्पत्ति को, या उसमें के किसी हित को, यह जानते हुये कि ऐसी सम्पत्ति या हित पर उसका कोई अधिकार या अधिकारपूर्ण दावा नहीं है, कपटपूर्वक प्रतिगृहीत करेगा, प्राप्त करेगा, या उस पर दावा करेगा, अथवा किसी संपत्ति या उसमें के किसी हित पर किसी अधिकार के बारे में जानते हुए की इस पर उसका कोई वैधानिक अधिकार नहीं है और  हड़पने , छीनने  के आशय से मिथ्या दावा  करेगा तो वह व्यक्ति धारा 207 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा। विधिक सलाहकार -मुकेश भारती एड0


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