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Raibareli News: जन जाग्रति के अग्रदूत परम् आदरणीय स्व0 श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) जी का मनाया परिनिर्वाण दिवस

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संवाददाता :: रायबरेली ::रामलखन गौतम {c01} :: Dt.27.12.2022 ::बहुजन समाज में जन जाग्रति के अग्रदूत परम् आदरणीय स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) जी का मनाया गया परिनिर्वाण दिवसStikar

रायबरेलीआज Dt.26 .12.2022 को बेहटा कलॉं में स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) जी का परिनिर्वाण दिवस मनाया गया है। बेहटा कलॉं की जन्मभूमि पर जन्म लेनेवाले ऐसे महान व्यक्ति के विषय में बताने की प्रयास किया है जिन्होंने दलित में चेतना जागृति फैलाई और उनके हक़ अधिकार के लिए जीवन भर लड़ाई लड़े और सम्मान दिलाया। हम बात कर रहे है आज से 3 दशक पहले की रायबरेली में सन 1980-90 के दशक में रायबरेली के बेहटा कलॉं क्षेत्र में फैले सुवर्ण समाज के दहशत से दलित समाज भयभीत था।

Mukesh Bharti
Mukesh Bharti: Chief Editor- Bahujan India 24 News

स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) की चेतना और जागृति और हक़ अधिकार की लड़ाई की बजह से दलित समाज का दबदबा बना और स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) को एक सामाजिक नेता के रूप में ख्याति प्राप्ति हुई। स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) ने सुवर्ण समाज के ठाकुरों के दिलो में खौफ बनाया। जिसकी बजह से दलित समाज सिर उठाकर बात करने में सक्षम हो पाया है दलित समाज की आज जो निर्भीक स्थित है और जो सुवर्ण के ऑखो में ऑखे डाल कर बात करने की हिम्मत है वह सभी उन्ही महान शख्सियत की देन है वो थे अपने समय के जाने – माने, अनुशासित परम् आदरणीय श्री रामेश्वर (मास्टर बाबाजी) जिनकी अध्यापन शैली अद्वितीय थी और साथ ही साथ बेहद ही अनुशासित और सख्त मिजाज के थे। स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) अध्यापन के साथ वो समाज के उस समय पंचायत व्यवस्था की भी अगुवाई करते थे ऐसा सुना है।


बहुजन समाज में जन जाग्रति के अग्रदूत परम् आदरणीय स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) जी का मनाया गया परिनिर्वाण दिवस


रायबरेली:रामलखन गौतम की खास रिपोर्टरायबरेली जनपद के बेहटा कलॉं ग्राम में दलित समाज की निर्भीक एवं निडर की स्थित का कारण के पीछे स्व0 श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) का हाथ है जो उनके संघर्षों का आज भी परिचायक है आप को बताते चले की सन 1980 के Stikarदशक में बेहटा कलॉं ग्राम में एक बेहद खौफनाक वारदात हुई थी, जिससे दलित समाज डर और सहम गया था घटना ये घटी थी कि ग्राम सभा के धोबिन टोला में रहने वाले हमारे समाज के सदस्य जंगली दादाजी, जो पडोसी दबंग ठाकुरो के यहॉ काम करते रहे होंगे बाद में काम करने से मना कर होगा और काम न करने के कारण सवर्ण ठोकरों से दलित समाज का मनमोटाव हो गया था, एक बार की बात है बताया जाता है कि सवर्ण ठोकरों के खेत में जानवर चला गया या उनके घर की ओर यह क्लेयर नही है दलित पीड़ित परिवार का कहना है कि सवर्ण ठोकरों के खेत में भैस नहु गयी थी बल्कि अपनी भैस को ताल से पानी पिलाकर लौट रहे थेउसी वक्त पहले से घात लगाए बैठे सुवर्ण समाज के एक व्यक्ति नें लाठी से बहुत बुरी तरह मार दिया था, जिसकी वजह से जंगली दादाजी की तत्काल मौके पर मौत हो गयी। जिस घटना को ग्राम सभा के ही दो व्यक्ति धोखे पासी और बदलू मिस्त्री और अन्य लोगो नें मारते हुए देख लिया था। लाठी से पिटाई से मारने के बाद सवर्ण ठोकरों घर छोड़कर पुलिस से बचने के लिए भग गये। किसी तरह पुलिस को सूचना दी गयी मौके पर पुलिस सूचना पर पकड ले गयी लेकिन बाद में पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाये फिर बाद में प्रशासन के दबाब और कार्यवाही में अभियुक्तों को दौडाकर रेवारी पसियॉखेडा के पकड लिये गये थे।


बहुजन समाज में जन जाग्रति के अग्रदूत परम् आदरणीय स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) जी का मनाया गया परिनिर्वाण दिवस


Ramlakhan Rai Bareli
ब्यूरो रिपोर्ट : राम लखन गौतम -रायबरेली
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स्व0 श्री रामेश्वर (मास्टर बाबाजी) जन्म सन् 1938मृत्यु सन् 2007

रायबरेली:रामलखन गौतम की खास रिपोर्टलाठी की पिटाई से जंगली दादाजी की मौके पर मौत हो जाने से दलित समाज एक जुट हुआ और एकता का परिचय देते हुए समाज स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) बाबाजी की अगुवाई में पुलिसिया कार्यवाही न होने पर गांव के सभी लोग डेथ बॉडी लेकर रायबरेली पहुंचे गये ,और पोस्टमार्टम कराया गया और उसी दौरान रायबरेली में सामाजिक कार्यकर्ता रामलाला अकेला जी स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) बाबाजी को मिल गये सभी ने साथ दिया। , समाज के सभी की राय पर बाबाजी की अगुवाई में जनपद रायबरेली DM office के सामने डेथ बॉडी रखकर धरना और प्रदर्शन हुआ। उस समय इंदिरा जी के बेहद करीब और घनिष्ठ ऑफिसर बुआ सिंह जिले के पुलिस अधीक्षक हुआ करते थे। जैसे इस घटना को मीडिया ने कवरेज किया और बात जनता में मीडिया के माध्यम से पहुंची तो जिले का सबसे बडा मुद्दा बन गया, उसी समय हरिजन कल्याण विभाग में भी महिला अधिकारी कार्यरत थी, जिन्होंने तत्काल सहायता धनराधी और जमीन मुहैया कराने का आदेश पारित किया और पुलिस के बड़े अधिकारी धरना प्रदर्शन से दबाव महसूस किया और न्यायहित में अभियुक्तों को जेल भेजा बाद में न्यायलय अभियुक्तों को दोषी मानकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दलित समाज का रायबरेली में पहला धरना प्रदर्शन देखकर प्रशासन ने कार्यवाही का अश्वासन दिया उसके बाद श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) बाबाजी ने सभी लोग के साथ डेथ बॉडी लेकर गॉव वापस आ गये और क्रिया कर्म दाह संस्कार आदि किया गया।

Stikar
रायबरेली:रामलखन गौतम की खास रिपोर्टदलित समाज की रायबरेली जनपद में पहली जीत थी हमारे समाज की पहली एकसूत्रता व एकता का परिचय दिया और सुवर्ण समाज पर विजय गाथा का परचम लहराया। ठाकुरों को जेल भेजवाने की कारवाही से आस पास के ग्राम पंचायत के सभी सुवर्ण हमारे दलित पिछड़े समाज के लोगो को दुश्मन की नजर से देखने लगे थे, और स्वयं में जलते रहते थे। इस इंसाफ की लड़ाई में अहम् बात ये थी कि मुकदमे में स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) बाबाजी को पुलिस ने गवाह बनाया था जिनपर सवर्ण विरादरी के लोग बहुत दबाव डाले और जान से मरने की धमकी भी दी लेकिन बाबा जी टस से मसला न हुए और अपनी बात पर अडे रहे और अदालत में डटकर गवाही दी की जिसको लिखवाया गया है उसी ने मारा था ये थी दलित समाज की 1980 के दशक की बेहटॉ कलॉ की एकता और जागरूकता की मिशाल जो पूरे क्षेत्र में कानून के राज का खौफ और ठाठ बन गयी और तो और कई मिश्रा और अन्य लोगो ने ने अदालत में झूठी गवाही देने के लिए गये थे लेकिन सच सच होता है झूठ उसे दबा नहीं सकता। न्यायालय ने दलित समाज के पक्ष में फैसला सुनाया और अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा हुई।


बहुजन समाज में जन जाग्रति के अग्रदूत परम् आदरणीय स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) जी का मनाया गया परिनिर्वाण दिवस


रायबरेली:रामलखन गौतम की खास रिपोर्ट। स्व0 श्री रामेश्वर (मास्टर साहब): सामाजिक और राजनैतिक पहचान :इस इंसाफ की लड़ाई व वारदात के कारण ही रामलाल अकेला जी की पहचान एक नेता के तौर पर मिली जो बाद में इन्हे बछरावां विधानसभा से विधायक की सीट पर पहुचाया, और बेहटा से घनिष्ठ लगाव हो गया सम्बन्ध बन गये।

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स्व0 श्री रामेश्वर (मास्टर बाबाजी) जन्म सन् 1938मृत्यु सन् 2007

इस इंसाफ की लड़ाई से ही रामलाल अकेला जी की पहचान एक नेता के तौर पर रायबरेली जनपद में मिली जो बाद में इन्हे बछरावां विधानसभा से विधायक की सीट तक पहुचाया, और उनका बेहटा से घनिष्ठ लगाव हो गया सम्बन्ध बन गये। इनका मूलनिवास विशूनाथ खेडा सरेनी था। इससे पहले रामलाल अकेला जी ITI रायबरेली में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे, और कर्मचारी यूनियन के नेता भी थे जो श्री रामेश्वर बाबाजी के ज्येष्ठ सुपुत्र ग्रुप के वरिष्ठतम सदस्य एवं समाज की मजबूती की जड आदरणीय श्री रमाशंकर बैसवार दादाजी के सहकर्मी थे और घनिष्ठ मित्र क्योकि उस समय श्री रमाशंकर दादाजी ITI रायबरेली में बाबू के पद पर कार्यरत थे। ,Stikar
रायबरेली:रामलखन गौतम की खास रिपोर्ट । विनम्रभाव श्रद्धांजलि: आज समाज के सभी लोग स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब) को अपनी अपनी श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हुए है दो मिनट का सभी ने मौन रखा और उनको याद किया गया सभी की आँखे नम हुई। समाज को एक सूत्र में कैसे बाधा जाये और सामजिक मंथन के बाद उपस्थित सभी ने अपनी अपनी विनम्र भाव श्रद्धांजलि बाबाजी को अर्पित किया। स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर साहब)के परिवार में बाबाजी के ज्येष्ठ पुत्र बेहद ही धाकड एवं सज्जनता के धनी आदरणीय श्री रामस्वरूप पुलिस मैन दादाजी (साइडो मंत्री गुप्ता सिंह ) दूसरे वरिष्ठतम सदस्य आदरणीय श्री रमाशंकर बैसवार दादाजी, (रिटायर बाबूजी ITI, वर्तमान एडवोकेट सिविल, रायबरेली) जिनके सुयोग्य पुत्र है जो अपने दलित समाज में आज शायद ही रायबरेली में कोई हो, बडे भैया आदरणीय विक्रम प्रताप जी जिनसे आज मुलाकात हुई बेहद ही सरस और जमीनी स्तर से जुडाव रखने वाले लगे,जो विश्व की सबसे ताकतवर देश अमेरिका में वैज्ञानिक पद पर कार्यरत है। परिवार के अन्य सदस्य संतोष कुमार दादाजी, और राकेश चाचाजी भी पुण्य तिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि देने के लिए उपस्थित रहे।

ऐसे प्रतिभावान व्यक्तित्व के धनी, सामाजिक महापुरुष। निडर, प्रतिभा सम्पन्न और आत्मसम्मानी, परम् श्रद्धेय परम् आदरणीय स्वर्गीय श्री रामेश्वर (मास्टर बाबाजी) को बारम्बार नमन,और विनम्रभाव श्रद्धांजलि। ऐसे महान व्यक्तित्व धरती पर कभी कभी जन्म लेते है।

ब्यूरो रिपोर्ट। रामलखन गौतम – रायबरेली।  बहुजन इंडिया 24 न्यूज़ (बहुजनों का नं01 डिजिटल मीडिया )


चाणक्य नीति : “आदमी अपने जन्म से नहीं अपने कर्मों से महान होता है।” :- आचार्य चाणक्य 


lekhak
डॉ श्यामसुन्दर दास

हिंदी के महान लेखक और कवि डॉ श्यामसुन्दर दास का संक्षिप्त परिचय और योगदान : डॉ श्यामसुन्दर दास का जन्म सन् 1875 ई. काशी (वाराणसी) में हुआ था।; और मृत्यु- 1945 ई.में हुई। डॉ श्यामसुन्दर दास ने जिस निष्ठा से हिन्दी के अभावों की पूर्ति के लिये लेखन कार्य किया और उसे कोश, इतिहास, काव्यशास्‍त्र भाषाविज्ञान, अनुसंधान पाठ्यपुस्तक और सम्पादित ग्रन्थों से सजाकर इस योग्य बना दिया कि वह इतिहास के खंडहरों से बाहर निकलकर विश्वविद्यालयों के भव्य-भवनों तक पहुँची।

डॉ श्यामसुन्दर दास के पूर्वज लाहौर के निवासी थे और पिता लाला देवी दास खन्ना काशी में कपड़े का व्यापार करते थे। इन्होंने 1897 ई. में बी.ए. पास किया था। यह 1899 ई. में हिन्दू स्कूल में कुछ दिनों तक अध्यापक रहे। उसके बाद लखनऊ के कालीचरन स्कूल में बहुत दिनों तक हैडमास्टर रहे। सन् 1921 ई. में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त हुए।
श्यामसुन्दर दास जी ने परिचयात्मक और आलोचनात्मक ग्रंथ लिखने के साथ ही कई दर्जन पुस्तकों का संपादन किया। पाठ्यपुस्तकों के रूप में इन्होंने कई दर्जन सुसंपादित संग्रह ग्रंथ प्रकाशित कराए। डॉ श्यामसुन्दर दास ने वैसे तो 70 साहित्य-कृतियों की रचना की लेकिन डॉ श्यामसुन्दर दास की प्रमुख साहित्य-कृतियाँ निम्नलिखित हैं।
चन्द्रावली’ अथवा ‘नासिकेतोपाख्यान’ पृथ्वीराज रासो ,मेघदूत, परमाल रासो, रानी केतकी की कहानी, भारतेन्दु नाटकावली ,नूतन संग्रह, हम्मीर रासो ,साहित्यलोचन जैसी प्रसिद्ध रचनाओं का निर्माण किया। जिनकी रचनाओं को बीए और एमए की कक्षा में आज पढ़ाया जाता है।


बहुजन प्रेरणा ( हिंदी दैनिक समाचार पत्र ) व बहुजन इंडिया 24 न्यूज़ (डिजिटल मीडिया)  Stikar

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Mukesh Bharti: Chief Editor- Bahujan India 24 News

(सम्पादक- मुकेश भारती एड0 ): किसी भी शिकायत के लिए सम्पर्क करे – 9336114041


Baba Saheb Dr Bheem Rao Ambedkar

Stikar” मैं ऐसे धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है। ” बाबा साहेब : डॉ भीम राव अम्बेडकर।


Stikar Aaj ka suvichar” जिन्दगी का हर एक छोटा हिस्सा ही
हमारी जिदंगी की सफ़लता का बड़ा हिस्सा होता है।”


आईपीसी की  धारा 323 में विधि का  क्या प्राविधान है ?

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IPC की धारा 323 का विवरण :जो कोई किसी अगर कोई अपनी इच्छा से किसी को चोट या नुकसान पहुंचाता है, तो ऐसा करने पर उसे 1 साल तक की कैद या 1 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है  तो वह व्यक्ति धारा 323 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

विधिक सलाहकार -मुकेश भारती एड0।Dt.27-12-2022

अथवा 

स्वेच्छया उपहति/चोट कारित करने के लिए दण्ड। उस दशा के सिवाय जिसके लिए धारा 334 में उपबंध है ,जो कोई स्वेच्छया उपहति करीत करेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से , जिसकी अवश्य एक वर्ष तक की हो सकरगि , या जुर्माने से जो 1000 रूपये तक का हो सकेगा , या दोनों से , दण्डित किया जायेगा।

उपहति /चोट से आशय ; जो कोई किसी व्यक्ति को शारीरिक पीड़ा , रोग या अंग -शैथिल्य कारित करता है, वह उपहति करता है। यह कहा जाता है।

विधिक सलाहकार -मुकेश भारती एड0।Dt.27-12-2022


नोट : दण्ड प्रक्रिया संहिता के अनुसार : यह जमानतीय और असंज्ञेय अपराध है जमानत कोई जुडिसियल मजिस्ट्रेट दे सकता है।


stikar kabir ki vani

“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।”

अर्थ – कबीर दास जी के दोहे से समझ में आता है कि संसार की बड़ी-बड़ी पुस्तकें पढ़कर कितने ही लोग मृत्यु के द्वार तक पहुंच गए, मगर वे सभी विद्वान नहीं हो सके थे। वे कहते हैं कि इतन पढ़ने के बजाय अगर कोई प्रेम या प्रेम के ढाई अक्षर ही पढ़ ले यानी कि प्रेम के वास्तविक रूप को पहचान ले तो वह सच्चा ज्ञानी माना जाएगा।


Dt.27.12.2022 । Virendra Kumar।  (History Department) Usmani Degree College Lakhimpur Kheri वीरेंद्र कुमार : प्रवक्ता – उस्मानी डिग्री कॉलेज लखीमपुर खीरी (यूजीसी नेट-इतिहास ) Dt. 27-12-2022

जलियांवाला बाग हत्याकांड:

आज़ादी के आंदोलन में हज़ारों निहत्थे पुरुष, महिलाएँ और बच्चे : 13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग में आयोजित एक शांतिपूर्ण बैठक में रॉलेट एक्ट 1919 का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों पर बिना बताये ब्रिगेडियर जनरल रेगीनाल्ड डायर ने गोली चलाने का आदेश दिया था, जिसमें हज़ारों निहत्थे पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मारे गए थे। इस कांड में मारे गए लोग रॉलेट एक्ट 1919 का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। इस हत्या काण्ड का बदला लेने के लिए वर्ष 1940 में सरदार उधम सिंह ने जनरल डायर की हत्या कर दी थी। वीरेंद्र कुमार : प्रवक्ता – उस्मानी डिग्री कॉलेज लखीमपुर खीरी (यूजीसी नेट-इतिहास ) Dt. 27-12-2022

Virendra kuamr Usmani Degree College Lakhimpur Kheri
Virendra Kumar Usmani Degree College

Stikar Samany Gyan 2023
क्या है रॉलेट एक्ट 1919 को जाने :
प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के दौरान भारत की ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी आपातकालीन शक्तियों की एक शृंखला बनाई जिसका उद्देश्य विध्वंसक गतिविधियों का मुकाबला करना था।इस संदर्भ में सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली राजद्रोह समिति की सिफारिशों पर यह अधिनियम पारित किया गया था। इस अधिनियम ने सरकार को राजनीतिक गतिविधियों को दबाने के लिये अधिकार प्रदान किये और दो साल तक बिना किसी मुकदमे के राजनीतिक कैदियों को हिरासत में रखने की अनुमति दी।
जलियांवाला बाग हत्या काण्ड की पृष्ठभूमि: महात्मा गांधी इस तरह के अन्यायपूर्ण कानूनों के खिलाफ अहिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करना चाहते थे, जो 6 अप्रैल, 1919 को शुरू हुआ। 9 अप्रैल, 1919 को पंजाब में दो राष्ट्रवादी नेताओं सैफुद्दीन किचलू और डॉ सत्यपाल को ब्रिटिश अधिकारियों ने बिना किसी वारेंट के गिरफ्तार कर लिया। इससे भारतीय प्रदर्शनकारियों में आक्रोश पैदा हो गया जो 10 अप्रैल को हज़ारों की संख्या में अपने नेताओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिये निकले थे।भविष्य में इस प्रकार के किसी भी विरोध को रोकने हेतु सरकार ने मार्शल लॉ लागू कियाHistory और पंजाब में कानून-व्यवस्था ब्रिगेडियर-जनरल डायर को सौंप दी गई।Stikar घटना का दिन: 13 अप्रैल, बैसाखी के दिन अमृतसर में निषेधाज्ञा से अनजान ज़्यादातर पड़ोसी गाँव के लोगों की एक बड़ी भीड़ जालियांवाला बाग में जमा हो गई।इस बड़ी भीड़ को तितर बितर करने के लिए ब्रिगेडियर- जनरल डायर अपने सैनिकों के साथ घटनास्थल पर पहुँचा। सैनिकों ने जनरल डायर के आदेश के तहत सभा को घेर कर एकमात्र निकास द्वार को अवरुद्ध कर दिया और निहत्थे भीड़ पर गोलियाँ चलाना शुरू कर दी दीं, जिसमें 1000 से अधिक निहत्थे पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की मौत हो गई।Genral Knowledge
जलियांवाला बाग हत्याकांड की घटना का महत्त्व:जलियांवाला बाग भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण स्थल बन गया और अब यह देश का एक महत्त्वपूर्ण स्मारक है।जलियांवाला बाग त्रासदी उन कारणों में से एक थी जिसके कारण महात्मा गांधी ने अपना पहला, बड़े पैमाने पर और निरंतर अहिंसक विरोध (सत्याग्रह) अभियान, असहयोग आंदोलन (1920–22) का आयोजन शुरू किया।इस घटना के विरोध में बांग्ला कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1915 में प्राप्त नाइटहुड की उपाधि का त्याग कर दिया।भारत की तत्कालीन सरकार ने घटना (हंटर आयोग) की जाँच का आदेश दिया, जिसने वर्ष 1920 में डायर के कार्यों के लिये निंदा की और उसे सेना से इस्तीफा देने का आदेश दिया। वीरेंद्र कुमार : प्रवक्ता – उस्मानी डिग्री कॉलेज लखीमपुर खीरी (यूजीसी नेट-इतिहास ) Dt. 27-12-2022


घरेलू उपचार :5 मिनट में खांसी से छुटकारा कैसे पाएं?

दिसंबर और जनवरी के महिने में हम सभी को अक्सर सर्दी -जुकाम और खासी की शिकायत रहती है। घरेलू उपचार से सर्दी खासी से निजात

Dr Ajay Annat Chaudhry
डॉ अजय अनंत चौधरी

पाये।Gharelu Upchar

अदरक और नमक:अदरक से भी सूखी खांसी में आराम मिलता है। इसके लिए अदरक की एक गांठ को कूटकर उसमें एक चुटकी नमक मिला लें और दाढ़ के नीचे दबा लें। उसका रस धीरे-धीरे मुंह के अंदर जाने दें। 5 मिनट तक उसे मुंह में रखें और फिर कुल्ला कर लें।सर्दी -जुकाम और खासी में फाफी रहत आप को मिलेगी। डॉ अजय अनंत चौधरी Dt.27-12-2022


लौंग और शहद खाएं- खांसी या जुकाम होने पर आप लौंग का सेवन करें
तुलसी अदरक की चाय- अगर आप बहती नांक और खांसी से परेशान हैं तो आपको गर्म तासीर की चीजों का सेवन करना चाहिए ।शहद और अदरक का रस- जुकाम एक ऐसी समस्या है जो हफ्तों में जाकर ठीक होती है। भाप लें- सर्दी-खांसी में सबसे ज्यादा राहत भाप लेने से मिलती है।


सर्दी-खांसी और जुकाम से राहत के लिए घरेलू उपचार | Home Remedies For Common Cold And Cough के लिए निम्न का भी सेवन करके ठीक हो सकते है।
1-अदरक की चाय (Ginger Tea) का सेवन करें। Gharelu Upchar
2-आंवला का सेवन (Amla Consumption) का सेवन करें।
3-शहद का सेवन (Honey Consumption) का सेवन करें।
4-खांसी के लिए रामबाण दवा है तुलसी (Tulsi Home Remedy For Cough In Hindi) का सेवन करें।
5-हल्दी दूध (Turmeric Milk) का सेवन करें। घरेलू उपचार से सर्दी -जुकाम ,खासी से निजात पाये। डॉ अजय अनंत चौधरी Dt.27-12-2022


प्रथम विश्व युद्ध

ऑस्ट्रिया के सिंहासन के उत्तराधिकारी आर्चड्युक फर्डिनेंड और उनकी पत्नी का वध इस युद्ध का तात्कालिक कारण था। यह घटना 28 जून 1914, को सेराजेवो में हुई थी। एक माह के बाद ऑस्ट्रिया ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध घोषित किया। रूस, फ़्रांस और ब्रिटेन ने सर्बिया की सहायता की और जर्मनी ने आस्ट्रिया की। Genral Knowledge
साम्राज्यवाद (Imperialism): प्रथम विश्व युद्ध से पहले अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्से कच्चे माल की उपलब्धता के कारण यूरोपीय देशों के बीच विवाद का विषय बने हुए थे। जब जर्मनी और इटली इस उपनिवेशवादी दौड़ में शामिल हुए तो उनके विस्तार के लिये बहुत कम संभावना बची। इसका परिणाम यह हुआ कि इन देशों ने उपनिवेशवादी विस्तार की एक नई नीति अपनाई। यह नीति थी दूसरे राष्ट्रों के उपनिवेशों पर बलपूर्वक अधिकार कर अपनी स्थिति को सुदृढ़ किया जाए। बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा और अधिक साम्राज्यों की इच्छा के कारण यूरोपीय देशों के मध्य टकराव में वृद्धि हुई जिसने समस्त विश्व को प्रथम विश्व युद्ध में धकेलने में मदद की। इसी प्रकार मोरक्को तथा बोस्निया संकट ने भी इंग्लैंड एवं जर्मनी के बीच प्रतिस्पर्द्धा को और बढ़ावा दिया।
अपने प्रभाव क्षेत्र में वृद्धि करने के उद्देश्य से जर्मनी ने जब बर्लिन-बगदाद रेल मार्ग योजना बनाई तो इंग्लैंड के साथ-साथ फ्राँस और रूस ने इसका विरोध किया, जिसके चलते इनके बीच कटुता मेंऔर अधिक वृद्धि हुई।

बहुजन प्रेरणा दैनिक समाचार पत्र व बहुजन इंडिया 24 न्यूज़ (सम्पादक- मुकेश भारती ) किसी भी शिकायत के लिए सम्पर्क करे – 9336114041

Ram Kumar Pal
Ram Kumar Pal Bareilly UP

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सैन्यवाद (Militarism): 20वीं सदी में प्रवेश करते ही विश्व में हथियारों की दौड़ शुरू हो गई थी। वर्ष 1914 तक जर्मनी में सैन्य निर्माण में सबसे अधिक वृद्धि हुई। ग्रेट ब्रिटेन और जर्मनी दोनों ने इस समयावधि में अपनी नौ-सेनाओं में काफी वृद्धि की। सैन्यवाद की दिशा में हुई इस वृद्धि ने युद्ध में शामिल देशों को और आगे बढ़ने में मदद की।
वर्ष 1911 में आंग्ल जर्मन नाविक प्रतिस्पर्द्धा के परिणामस्वरूप ‘अगादिर का संकट’ उत्पन्न हो गया। हालाँकि इसे सुलझाने का प्रयास किया गया परंतु यह प्रयास सफल नहीं हो सका। वर्ष 1912 में जर्मनी में एक विशाल जहाज़ ‘इम्प रेटर’ का निर्माण किया गया जो उस समय का सबसे बड़ा जहाज़ था। इससे इंग्लैंड और जर्मनी के मध्य वैमनस्य एवं प्रतिस्पर्द्धा में वृद्धि हुई।
राष्ट्रवाद (Nationalism): जर्मनी और इटली का एकीकरण भी राष्ट्रवाद के आधार पर ही किया गया था। बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवाद की भावना अधिक प्रबल थी। चूँकि उस समय बाल्कन प्रदेश तुर्की साम्राज्य के अंतर्गत आता था, अतः जब तुर्की साम्राज्य कमज़ोर पड़ने लगा तो इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने स्वतंत्रता की मांग शुरू कर दी।


Genral Knowledge

बोस्निया और हर्जेगोविना में रहने वाले स्लाविक लोग ऑस्ट्रिया-हंगरी का हिस्सा नहीं बना रहना चाहते थे, बल्कि वे सर्बिया में शामिल होना चाहते थे और बहुत हद तक उनकी इसी इच्छा के परिणामस्वरूप प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई। इस तरह राष्ट्रवाद युद्ध का कारण बना।रूस का मानना था कि स्लाव यदि ऑस्ट्रिया-हंगरी एवं तुर्की से स्वतंत्र हो जाता है तो वह उसके प्रभाव में आ जाएगा, यही कारण रहा कि रूस ने अखिल स्लाव अथवा सर्वस्लाववाद आंदोलन को बल दिया। स्पष्ट है कि इससे रूस और ऑस्ट्रिया–हंगरी के मध्य संबंधों में कटुता आई।इसी तरह के और भी बहुत से उदाहरण रहे जिन्होंने राष्ट्रवाद की भावना को उग्र बनाते हुए संबंधों को तनावपूर्ण स्थिति में ला खड़ा किया। ऐसा ही एक उदाहरण है सर्वजर्मन आंदोलन।



आईपीसी की  धारा 207 में विधि का  क्या प्राविधान है

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विधिक सलाहकार : Mukesh Bharti Advocate

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IPC की धारा 207 का विवरण :जो कोई किसी सम्पत्ति को, या उसमें के किसी हित को, यह जानते हुये कि ऐसी सम्पत्ति या हित पर उसका कोई अधिकार या अधिकारपूर्ण दावा नहीं है, कपटपूर्वक प्रतिगृहीत करेगा, प्राप्त करेगा, या उस पर दावा करेगा, अथवा किसी संपत्ति या उसमें के किसी हित पर किसी अधिकार के बारे में जानते हुए की इस पर उसका कोई वैधानिक अधिकार नहीं है और  हड़पने , छीनने  के आशय से मिथ्या दावा  करेगा तो वह व्यक्ति धारा 207 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा। विधिक सलाहकार -मुकेश भारती एड0



Stikarसंत रैदास ने ऊँच-नीच की भावना तथा ईश्वर-भक्ति के नाम पर किये जाने वाले विवाद को सारहीन तथा निरर्थक बताया और जातिपाति का घोर खंडन किया और सबको परस्पर मिलजुल कर प्रेमपूर्वक रहने का उपदेश दिया।Bahujan Movement:Guru ravidas ji

संत रैदास स्वयं मधुर तथा भक्तिपूर्ण भजनों की रचना करते थे और उनके शिष्य उन्हें भाव-विभोर होकर सुनाते थे। उनका विश्वास था कि वेद, कुरान, पुराण आदि ग्रन्थों में जिस परमेश्वर राम, कृष्ण, करीम, राघव आदि का गुणगान किया गया है।सब एक ही परमेश्वर के विविध नाम हैं। एक ही अलौकिक शक्ति है और कोई दूजा नहीं है। सभी मनुष्य सामान है कोई ऊच नीच नहीं है।ऊच नीच जैसी सामाजिक बुराई सभी चालाक लोग अपने फायदे के लिए बनाये है। ईश्वर सभी को सामान दृष्टि से देखता है। मानव मानव में कोई भेद नहीं है।

stikar
कृस्न, करीम, राम, हरि, राघव, जब लग एक न पेखा।
वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा ॥
चारो वेद के करे खंडौती । जन रैदास करे दंडौती।।

संत रविदास का विश्वास था कि ईश्वर की भक्ति के लिए सदाचार, परहित-भावना तथा सद्व्यवहार का पालन करना अत्यावश्यक है। अभिमान त्याग कर दूसरों के साथ व्यवहार करने और विनम्रता तथा शिष्टता के गुणों का विकास करने पर उन्होंने बहुत बल दिया। अपने एक भजन में उन्होंने कहा है-stikar

कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पावै।
तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै॥

संत रविदास के विचारों का आशय यही है कि ईश्वर की भक्ति बड़े भाग्य से प्राप्त होती है। अभिमान शून्य रहकर काम करने वाला व्यक्ति जीवन में सफल रहता है जैसे कि विशालकाय हाथी शक्कर के कणों को चुनने में असमर्थ रहता है जबकि लघु शरीर की पिपीलिका (चींटी) इन कणों को सरलतापूर्वक चुन लेती है। इसी प्रकार अभिमान तथा बड़प्पन का भाव त्याग कर विनम्रतापूर्वक आचरण करने वाला मनुष्य ही ईश्वर का भक्त हो सकता है Bahujan Movement:


” मैं ऐसे धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है। ” बाबा साहेब : डॉ भीम राव अम्बेडकर।


stikar kabir ki vani

“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।”

अर्थ – कबीर दास जी के दोहे से समझ में आता है कि संसार की बड़ी-बड़ी पुस्तकें पढ़कर कितने ही लोग मृत्यु के द्वार तक पहुंच गए, मगर वे सभी विद्वान नहीं हो सके थे। वे कहते हैं कि इतन पढ़ने के बजाय अगर कोई प्रेम या प्रेम के ढाई अक्षर ही पढ़ ले यानी कि प्रेम के वास्तविक रूप को पहचान ले तो वह सच्चा ज्ञानी माना जाएगा


पेरियार रामास्वामी जयंती 17 सितम्बर मनाई जाती है। पेरियार रामास्वामी जयंती 17 सितम्बर 2023 को मनाई जायेगी ।

जीवन परिचय : Periyar saheb :पेरियार इरोड वेंकट नायकर रामासामी (जन्म  17 सितम्बर, 1879-मृत्यु 24 दिसम्बर, 1973) जिन्हे पेरियार (तमिल में अर्थ -सम्मानित व्यक्ति) नाम से भी जाना जाता था, पेरियार का जन्म पश्चिमी तमिलनाडु के इरोड में एक सम्पन्न, परम्परावादी हिन्दू धर्म की बलीजा जाति में हुआ था।जो उत्तर भारत में पाल और गड़ेरिया जाति के सामान समकक्ष है।

Mukesh Bharti
Mukesh Bharti: Chief Editor- Bahujan India 24 News

और ओबीसी जाति का प्रतिनिधित्व करती है।Bahujan Movement: 1885 में उन्होंने एक स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में अध्ययन हेतु दाखिला लिया था । पर कोई पाँच साल से कम की औपचारिक शिक्षा मिलने के बाद ही उन्हें अपने पिता के व्यवसाय से जुड़ना पड़ा। कई पीढ़ियों से उनके घर पर भजन , कीर्तन तथा उपदेशों का सिलसिला चलता ही रहता था। बचपन से ही वे तर्कशील और विवेकवान व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे धार्मिक ग्रन्थ और उपदशों में कही बातों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते रहते थे जिससे उनके पिता बहुत नाराज रहते थे । हिन्दू महाकाव्यों तथा पुराणों में कही बातों की परस्पर विरोधी तथा बाल विवाह, देवदासी प्रथा, विधवा पुनर्विवाह के विरुद्ध अवधारणा, स्त्रियों तथा दलितों के शोषण के घोर विरोधी थे। अपने काशी यात्रा के बाद उन्होंने हिन्दू वर्ण व्यवस्था और कुरीतियों का भी विरोध ही नहीं बल्कि बहिष्कार भी किया। 19 वर्ष की उम्र में उनकी शादी नगम्मल नाम की 13 वर्षीय स्त्री से हुई। उन्होंने अपना पत्नी को भी अपने विचारों से ओत प्रोत किया। तर्कशक्ति के कारण भारत ही नहीं बल्कि एशिया का सुकरात कहा जाता है।

Periyar saheb : पेरियार साहेब वैज्ञानिक दृष्टिकोण के व्यक्ति थे और तर्कशील थे। 20वीं सदी के तमिलनाडु के एक प्रमुख राजनेता व दलित शोषित, गरीबों के मसीहा थे।और बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर के समकालीन थे। अपने सिद्धांतो से समाज में फैली बुराइयों का नाश किया। इन्होंने जस्टिस पार्टी का गठन किया जिसका सिद्धान्त जातिवादी व गैर बराबरी वाले हिन्दुत्व का विरोध था। पेरियार अपनी मान्यता का पालन करते हुए मृत्युपर्यंत जाति और हिंदू-धर्म से उत्पन्न असमानता और अन्याय का विरोध करते रहे। ऐसा करते हुए उन्होंने लंबा, सार्थक, सक्रिय और सोद्देश्यपूर्ण जीवन जीया था।


 

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