ग्राम प्रधान से बाहुबली विधायक तक का कुलदीप सिंह सेंगर का सफर राजनीतिक इतिहास
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संवाददाता ::बांगरमऊ ::गंगा प्रकाश त्यागी {C011} :: Published Dt.13.02.2023 ::Time-9:50PM: ग्राम प्रधान से बाहुबली विधायक तक का कुलदीप सिंह सेंगर का सफर राजनीतिक इतिहास::बहुजन प्रेस

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Unnao News । ब्यूरो रिपोर्ट :गंगा प्रकाश त्यागी ।ग्राम प्रधान से बाहुबली विधायक तक का कुलदीप सिंह सेंगर का सफर राजनीतिक इतिहास
यूपी की बांगरमऊ विधानसभा सीट से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को भाजपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उन्नाव के बहुचर्चित दुष्कर्म कांड के आरोपी सेंगर सभी दलों की चौखट को चूम चुके हैं। सबसे पहले उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा, इसके बाद मायावती के ‘हाथी’ पर सवार हुए। फिर सपा की ‘साइकिल’ को अपनी राजनीति का हमसफर बनाया। आखिर में 2017 में भाजपा के टिकट पर विधायक बने।
उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िता की सड़क दुर्घटना के बाद सेंगर चौतरफा निशाने पर आ गए और इसके चलते भाजपा की भी काफी किरकिरी हुई। इस हादसे में पीड़िता चाची और मौसी की मौत हो गई, जबकि पीड़िता और उसका वकील गंभीर रूप से घायल हो गए। आइए जानते हैं यूपी के बाहुबली विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का राजनीतिक इतिहास…
कुलदीप सिंह सेंगर ना तो संघ की शाखाओं में निखरे हैं और ना ही भारतीय जनता पार्टी के मूल्यों में उनकी कोई आस्था रही है। वे पूरी तरह से अवसरवादी राजनीति का चेहरा हैं।
कुलदीप सेंगर उस वक्त चर्चा में आए, जब उन पर और उनके भाई अतुल सिंह सेंगर पर 11 से 20 जून 2017 के बीच एक महिला ने सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। इसके बाद जब मामले ने तूल पकड़ा तो आरोपियों पर मामला दर्ज किया गया और इसकी जांच एसआईटी को सौंपी गई।
कुलदीप के भाई अतुल पर पीड़िता के पिता की जेल में घुसकर पिटाई करने का आरोप भी लगा। पीड़िता के पिता ने कुछ दिनों बाद इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था
कुलदीप सिंह सेंगर की दबंगता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बलात्कार के आरोपों के बाद भी वो कभी मुख्यमंत्री सचिवालय में खिलखिलाते नजर आते हैं तो कभी SSP के घर के बाहर कहते हैं कि आरोप ही लगा है, भगोड़ा तो नहीं हूं।
कुलदीप सिंह सेंगर, योगी आदित्यानाथ की बिरादरी से आते हैं। संयोग ऐसा है कि जिस थाने ने पीड़िता का मामला दर्ज नहीं किया था, वहां के थानेदार से लेकर जिला पुलिस प्रमुख से लेकर राज्य पुलिस के मुखिया तक, सब ठाकुर हैं।
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