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चामर जाति के योद्धा – मदन दास जी महाराज रविदासिया सिख थे अपने समय के महान योद्धा रहे ।

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मदन दास जी महाराज रविदासिया सिख थे अपने समय के महान योद्धा रहे ।
चमकौर गढ़ी:चमकौर गढ़ी (छावनी ) के सिख इतिहास के महान योद्धे- भाई मदन सिंह रविदासिया जी जाति से चमार और भाई कट्ठा सिंह जी जाति से वाल्मीकि थे दोनो सिख भाई पंजाब के गाव पगडाना जिला पटियाला के रहने वाले थे। इनका पेशा कपडा बुनना था, दोनो भाई गुरु गोविंद सिंह जी के हाथो 30 मार्च 1630 को अमृत चखके गुरु के सिंह सजे थे।

मदन दास जी महाराज रविदासिया सिख थे अपने समय के महान योद्धा रहे ।
चमकोर गढ़ी के युद्ध 7 दिसंबर 1705 ई0 के दोरान गुरु गोविंद सिंह जी ने दोनो को चमकौर किले के दरवाजे पर पहरा देने का सबसे ओखा कार्य सौंपा गया था क्योकी दरवाजे से किले के अंदर जाना बिलकुल आसान था ताकि कोई मुगल किले मे प्रवेश न कर सके,दोनों भाईयो ने गुरु गोविंद सिंह जी के नाम के जयकारे छोडते हुए मुगलो को मारते गये, खून से सनी तलवार देखकर मुगल डर गये थे,लाखो लाशो को देखकर मुगल हैरान रह गया जब उनको लगा की ये काबू नही आयेंगे तो दोनो पर गोलिया की बरसात की गई,और दोनो भाई गुरू गोविंद सिंह जी का नाम लेते हुए शहीदी पा गये,ये दोनो चमकौर की गडी के सबसे पहले शहिद थे।

मदन दास जी महाराज रविदासिया सिख थे अपने समय के महान योद्धा रहे ।
दोनों भाईयो को शहिद करके मुगलो ने इनका अंग अंग काटकर सैकडो टुकड़े कर दिए थे दोनो भाई आखिरी साँस तक गुरू का नाम जपते रहे, गुरू गोविंद सिंह जी उपर किले की चोटी से दोनो को युद्ध में लडते हुए देख रहे थे दोनों के पराक्रम की सहारना कर रहे थे। एक बार एक राजपूत ने गुरू गोविंद सिंह जी को रवालसर जाने को कहा उसके मन की खोट था। भाई मदन सिंह जी ने कहा करेगा सो भरेगा,गुरू का की करेगा सेवक ते काज सरेगा,दूत मरेगा, गुरु के सिखो ने कहा भाई मदन सिंह जी क्या कह रहे हो इसनू आगाम निगम दि सोजी हो गई है, गुरू गोविंद सिंह जी ने इसका जिकर साखि जफरनामे मे भी किया है।

मदन दास जी महाराज रविदासिया सिख थे अपने समय के महान योद्धा रहे ।
दोनो भाई कवि थे भाई मदन सिंह जी तो उस समय के महान 52 कवियों मे गिने जाते थे,दोनों का जिक्र चमकौर ते आनंदपूर के युद्धों में मिलता है जब चमकौर की गडी को खाली किया गया तो दोनो अजित सिंह जी के जत्थे मे शामिल थे और नवबोद्ध गले मे हंडी टांगें फिरते,गुलाम बनकर दिखाते है।

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