कुरावली के कोऑटोला में हुआ विशाल भंडारे का आयोजन
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संवाददाता : : मैनपुरी : : अवनीश कुमार : : कुरावली के कोऑटोला में हुआ विशाल भंडारे का आयोजन
कथा भागवत में सुनाई श्रीकृष्ण-सुदामा की कथा कुरावली/मैनपुरी:– कुरावली के मोहल्ला कौआटोला में अलूपुरा अड्डा के निकट चल रही श्रीमद् भागवत कथा के 8 वे दिन किया गया विशाल भंडारे का आयोजन। 1 जून से प्रारम्भ कथा का 7 वे दिन समापन कर 8 वे दिन 8 जून को भंडारे का था प्रोग्राम । आयोजक डॉ गंगाधर ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओ को किया था आमंत्रित। तो वही भक्त श्रद्धा में लीन कथा के सातों दिन बड़ी तादात में कथा में रहे मौजूद फिर भंडारे के दिन प्रसाद और भोजन के लिए भी दिखी हज़ारो की तादात। भंडारे में भोजन से लेकर ठंडे पानी तक कि व्यवस्था ने भक्तो का दिल जीत लिया। महिलाओ ने भी बढ़ चढ़ के लिए कार्यक्रम में हिस्सा पुरिया बेलने से लेकर अन्य कार्यो में दिया पूरा योगदान। कथा कार्यक्रम के अंतिम व सांतवें दिन कथा वाचक देवेन्द्र दीक्षित ने प्रवचन सुनाते हुए कहा कि मनुष्य स्वंय को भगवान बनाने की बजाय प्रभु का दास बनने का प्रयास करें। क्योंकि भक्ति भाव देख कर जब प्रभु में वात्सल्य जागता है तो वे सब कुछ छोड़ कर अपने भक्तरूपी संतान के पास दौड़े चले आते हैं। गृहस्थ जीवन में मनुष्य तनाव में जीता है। जब कि संत सद्भाव में जीता है। यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी बन जाओ क्योकि संतोष सबसे बड़ा धन है।उन्होने कथा भागवत में श्रीकृष्ण भक्त एवं बाल सखा सुदामा के चरित्र का वर्णन भी किया। कथावाचक ने श्रीकृष्ण एवं सुदामा की मित्रता के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सुदामा के आने की खबर पाकर किस प्रकार श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे। पानी परात को हाथ छूवो नाहीं, नैनन के जल से पग धोये। कृष्ण अपने बाल सखा सुदामा की आवभगत में इतने विभोर हो गए के द्वारका के नाथ हाथ जोड़कर और अंग लिपटाकर जल भरे नेत्रों से सुदामा का हालचाल पूछने लगे। उन्होंने बताया कि इस प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मित्रता में कभी धन दौलत आड़े नहीं आती। कथा वाचक ने सुदामा चरित्र की कथा का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा में भगवान कृष्ण व सुदामा की झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कथा कार्यक्रम के बाद 8 वे दिन भंडारे के मौके पर परीक्षत हवलदार कश्यप, राजेश्वरी देवी, मुकेश चंद्र, आयोजक गंगाधर कश्यप, रमन लाल, शिव कुमार, जसवंत, रामसनेही, राजबहादुर, महेश चंद्र, संजू दुबे, अजय शर्मा और दर्जनों कार्यक्रम के कार्यकर्ता आदि मौजूद रहे। जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में रात दिन एक कर दिया। तो वही क्षेत्र वासियो द्वारा तारीफ सुन कार्यक्रम आयोजक ने खुशी जाहिर कर बोले ईश्वर का आशीर्वाद मुझे मिल गया। यहां आए आचार्य पं० देवेन्द्र दीक्षित जी, कार्यकर्ता, और श्रद्धालुओं को मेरा बहुत बहुत धन्यवाद की उन्होंने हर तरीके से कार्यक्रम को सफल बने के लिए अपना कीमती समय दिया।
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