Mulayam Singh Yadav :मुलायम सिंह यादव तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे
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संवाददाता : :Lakhimpur : : Sandeepa Ray :: Date :: 12 .10 .2022 :: मुलायम सिंह यादव तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे
मुलायम सिंह यादव। भारतीय राजनीति नेता। मुलायम ने पहलवान और शिक्षक रहने के बाद देश की सियासत में 55 साल की लंबी पारी खेली। मुलायम तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। केंद्र में रक्षा मंत्री रहे। 22 नवंबर 1939 को सैफई में जन्मे मुलायम की पढ़ाई-लिखाई इटावा, फतेहाबाद और आगरा में हुई। मुलायम कुछ दिन तक मैनपुरी के करहल में जैन इंटर कॉलेज में शिक्षक रहे। पांच भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर मुलायम सिंह की दो शादियां हुईं। पहली पत्नी मालती देवी का निधन मई 2003 में हो गया था। अखिलेश यादव मुलायम की पहली पत्नी के ही बेटे हैं।
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मुलायम सिंह यादव। भारतीय राजनीति नेता। मुलायम ने पहलवान और शिक्षक रहने के बाद देश की सियासत में 55 साल की लंबी पारी खेली। मुलायम तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। केंद्र में रक्षा मंत्री रहे। 22 नवंबर 1939 को सैफई में जन्मे मुलायम की पढ़ाई-लिखाई इटावा, फतेहाबाद और आगरा में हुई। मुलायम कुछ दिन तक मैनपुरी के करहल में जैन इंटर कॉलेज में शिक्षक रहे। पांच भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर मुलायम सिंह की दो शादियां हुईं।
पहली पत्नी मालती देवी का निधन मई 2003 में हो गया था। अखिलेश यादव मुलायम की पहली पत्नी के ही बेटे हैं। मुलायम 1967 में 28 साल की उम्र में जसवंतनगर से पहली बार विधायक बने। मुलायम सिंह यादव 1967 से लेकर 1996 तक 8 बार उत्तर प्रदेश में विधानसभा के लिए चुने गए। एक बार 1982 से 87 तक विधान परिषद के सदस्य रहे। 1996 में ही उन्होंने लोकसभा का पहला चुनाव लड़ा और चुने गए। इसके बाद से 7 बार लोकसभा में पहुंचे। 10 अक्टूबर 2022 को निधन के वक्त भी मुलायम मैनपुरी से लोकसभा सदस्य थे।मुलायम 1977 में पहली बार यूपी में मंत्री बने। तब उन्हें कॉ-ऑपरेटिव और पशुपालन विभाग दिया गया। 1980 में लोकदल का अध्यक्ष पद संभाला। 1985-87 में उत्तर प्रदेश में जनता दल के अध्यक्ष रहे। पहली बार 1989 में यूपी के मुख्यमंत्री बने। 1993-95 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। 2003 में तीसरी बार सीएम बने और चार साल तक गद्दी पर रहे। 1996 में जब देवगौड़ा सरकार बनी, तब मुलायम उसमें रक्षा मंत्री बने। राजनीति के दांवपेच उन्होंने 60 के दशक में राममनोहर लोहिया और चरण सिंह से सीखे। लोहिया ही उन्हें राजनीति में लेकर आए। लोहिया की ही संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने उन्हें 1967 में टिकट दिया और वह पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे। उसके बाद वह लगातार प्रदेश के चुनावों में जीतते रहे। उनकी पहली पार्टी अगर संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी थी तो दूसरी पार्टी बनी चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाली भारतीय क्रांति दल, जिसमें वह 1968 में शामिल हुए। चरण सिंह की पार्टी के साथ जब संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का विलय हुआ तो भारतीय लोकदल बन गया। ये मुलायम के सियासी पारी की तीसरी पार्टी बनी।
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