ग्रामीण क्षेत्र में जन्म-मृत्यु पंजीकरण की सूचना प्रतिमाह उपलब्ध करायी जाये:–जिलाधिकारी
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संवाददाता : : मैनपुरी :: अवनीश कुमार :: Date :: 29 .10 .2022 :: संस्थागत प्रसव की दशा में प्रसूता को जननी सुरक्षा योजना लाभ के साथ ही जन्म प्रमाण पत्र भी मुहैया कराया जाये:– जिलाधिकारी
जन्म-मृत्यु पंजीकरण निधार्रित समय सीमा में हो
मैनपुरी- जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण संबंधी बैठक की समीक्षा के दौरान असंतोष व्यक्त करते हुये कहा कि कुछ प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रसव के उपरांत डिस्चार्ज होने के समय बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है। इसमें सबसे खराब प्रगति सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सुल्तानगंज, मानपुरहरी, घिरोर एवं जागीर की है। उन्होने सम्बन्धित प्रभारी चिकित्साधिकारियों को सचेत करते हुये कहा कि डिस्चार्ज के समय ही बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध करायें। भविष्य में यदि जन्म प्रमाण पत्र समय से उपलब्ध नहीं कराया गया तो सम्बन्धित प्रभारी चिकित्साधिकारी की जिम्मेदारी तय कर कायर्वाही होगी। उन्होने कहा कि शहरी, ग्रामीण क्षेत्र में पंजीकरण अधिकारी आपस में समन्वय स्थापित कर प्रगति सुधारें। ग्रामीण क्षेत्र में जन्म-मृत्यु पंजीकरण की जिम्मेदारी सहायक विकास अधिकारी पंचायत, पंचायत सचिवों एवं शहरी क्षेत्र में पंजीकरण हेतु अधिशासी अधिकारी नगर निकाय जिम्मेदार है। इन्हीं के द्वारा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे, जन्म-मृत्यु पंजीकरण सिर्फ सीआरएस पोटर्ल पर ही होगा, साॅफ्टवेयर के प्रयोग से पंजीयन कार्य में एकरूकता आयेगी और सम्बन्धित सूचनाएं संकलित करने में आसानी होगी। सूचनाएं स्वतः तैयार होंगी, पंजीकृत जन्म-मृत्यु की घटनाओं की सूचनाएं एक पटल पर एकत्रित हो सकेंगी। 
श्री सिंह ने जिला पंचायत राज अधिकारी को निदेर्शित करते हुये कहा कि 01 सप्ताह में जनपद के प्रत्येक ग्राम पंचायत सचिवालय पर सम्बन्धित सचिव का नाम, मोबाइल नम्बर अंकित करायें। ताकि ग्रामीण क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को जन्म-मृत्यु पंजीकरण के लिए कठिनाई का सामना न करना पड़े साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में जन्म-मृत्यु सम्बन्धी सूचना मासिक रूप से मुख्य चिकित्साधिकारी कायार्लय को उपलब्ध करायी जाये। उन्होने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों का आपस में तालमेल न होने के कारण प्रगति काफी खराब है। नोडल विभाग द्वारा इस कार्य में कोई रुचि नहीं ली जा रही है और नाही पंचायत, नगर निकाय विभाग द्वारा स्वास्थ्य विभाग को प्रतिमाह सूचना उपलब्ध कराई जा रही है। निजी चिकित्सालयों द्वारा भी स्वास्थ्य विभाग को जन्म-मृत्यु की सूचना प्रेषित नहीं की जा रही है। उन्होने कहा कि निजी चिकित्सालय भी स्वास्थ्य विभाग को अपने यहा पैदा हुए बच्चों की जानकारी दें। इसमें कोताही बरतने पर निजी चिकित्सालयों के संचालकों की जिम्मेदारी तय की जाये। सभी ग्राम पंचायतों में जन्म-मृत्यु, कुटुंब रजिस्टर अद्यावधिक रहें।
उन्होने कहा कि जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के अन्तगर्त जन्म के 48 घंटे के अंदर संस्थागत प्रसवों का सीआरएस पोटर्ल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। यदि संस्थाओं द्वारा जन्म पंजीकरण 48 घंटे के अंदर नहीं कराया जाता है। तो संस्था प्रभारियों से विलम्ब शुल्क भरवाना सुनिश्चित किया जाये, साथ ही किसी अन्य पोटर्ल अथवा मुद्रित प्रारूप पर प्रमाण पत्र जारी नहीं कराये जायें। उन्होने समीक्षा के दौरान पाया कि जनवरी 2022 से सितम्बर 2022 तक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सुल्तानगंज पर 1880 जन्म पंजीकरण के सापेक्ष 1014, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र किशनी पर 1926 जन्म पंजीकरण के सापेक्ष 1748, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र घिरोर पर 1311 जन्म पंजीकरण के सापेक्ष 609, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मानपुरहरी पर 1225 जन्म पंजीकरण के सापेक्ष 679, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बेवर पर 552 जन्म पंजीकरण के सापेक्ष 420 जन्म पंजीकरण कराये गये हैं। जिस पर उन्होने संस्थाओं के प्रभारी अधिकारियों, सम्बन्धित चिकित्साधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुये कहा कि जन्म पंजीकरण सीआरएस पोटर्ल पर 01 सप्ताह के अंदर शत-प्रतिशत पंजीकरण कराना सुनिश्चित करें।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार, अपर जिलाधिकारी राम जी मिश्र, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. पी.पी.सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश चन्द, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी प्रशांत, भूमि संरक्षण अधिकारी विजय सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा आर.के. सिंह, समस्त खंड विकास अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर निकाय आदि उपस्थित रहे।
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