मैनपुरी में मिलावटखोरों पर शिकंजा, 12 पर मुकदमा पंजीकृत
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संवाददाता ::मैनपुरी::अवनीश कुमार{C01} :: Date ::16 ::12::.2022:: मैनपुरी में मिलावटखोरों पर शिकंजा, 12 पर मुकदमा पंजीकृत – मिलावट और नियमों के उल्लंघन के लगे आरोप, जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई
मैनपुरी। खाद्य पदार्थों में मिलावट करने और बिना लाइसेंस कारोबार करने पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद 12 विक्रेताओं के विरुद्ध एसीजेएम न्यायालय में 13 मुकदमे दायर किए गए हैं। मुकदमे दायर करने से पूर्व शासन से भी अनुमति ले ली गई है।

नियमित निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने नमूने लेकर जांच के लिए भेजे थे। जांच रिपोर्ट आई तो नौ नमूने फेल हो गए। इनमें से अधिकांश नमूनों में अखाद्य रंग की मिलावट पाई गई है। अखाद्य रंग मानव शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। इसलिए इन नमूनों को भी हानिकाकरक ही श्रेणी में रखा गया। इसके अलावा टीम के निरीक्षण के दौरान चार विक्रेता बिना लाइसेंस के खाद्य कारोबार करते मिले थे। सभी के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन से अनुमति मांगी गई थी। शासन से अनुमति मिलने के बाद कुल 12 विक्रेताओं के विरुद्ध एसीजेएम न्यायालय में 13 मुकदमे दायर किए गए हैं। इसमें से नौ नमूने मिलावट करने और चार नमूने बिना लाइसेंस कारोबार करने पर दायर किए गए हैं। एक विक्रेता के दो नमूने फेल होने पर उसके विरुद्ध दो मुकदमे दायर किए गए हैं। सहायक आयुक्त द्वितीय (खाद्य) डॉ. टीआर रावत ने बताया कि समय-समय पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। जांच रिपोर्ट में नमूने फेल होने और बिना लाइसेंस कारोबार करने पर 12 विक्रेताओं के विरुद्ध 13 मुकदमे दायर किए गए हैं। अब न्यायालय ही सुनवाई के बाद इसमें कार्रवाई करेगा
इन विक्रेताओं के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
– अमित राठौर, बागवान मैनपुरी, सॉस में अखाद्य रंग की मिलावट।
– हरवेंद्र बौद्घ, चांदेश्वर रोड मैनपुरी, आइस कैंडी में रंग की अधिकता।
– मनोज कुमार, करहल, जेबी नमकीन में अखाद्य रंग की मिलावट।
– ज्ञानेश कुमार, अग्रवाल मैनपुरी, दीवानी नमकीन में अखाद्य रंग की मिलावट।
– अर्पित चौहान, ताहरपुर घिरोर, सरसों के तेल में सिंथेटिक रंग की मिलावट।
– अर्पित चौहान, ताहरपुर घिरोर, सरसों के तेल में सिंथेटिक रंग की मिलावट।
– सिंधु अरोरा, पंजाबी कॉलोनी मैनपुरी, राजश्री में गैंबियर की मिलावट।
– रौनक जैन, करहल, जेबी रंग में अखाद्य रंग की मिलावट।
– विजय कुमार, करहल रोड मैनपुरी, कलश नमकीन में अखाद्य रंग की मिलावट।
– सुधीर पांडेय, कमलपुर, बिना लाइसेंस के कारोबार।
– रणवीर सिंह चौहान, जासमई, बिना लाइसेंस कारोबार।
– सचिन जैन, कुरावली, बिना लाइसेंस कारोबार।
– बबलू यादव, महोलीखेड़ा, बिना लाइसेंस कारोबार।
संवाददाता ::अयोध्या ::फूलचन्द्र{C01} :: Date ::17 ::12::.2022::अयोध्या जिले का जिला कारागार का जिला जज संजीव फौजदार के साथ जिलाधिकारी नितीश कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुनिराज जी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह व एडीजे शैलेंद्र सिंह यादव ने जिला कारागार का किया निरीक्षण। कारागार में पाकशाला, चिकित्सालय आदि का भ्रमण कर भोजन व चिकित्सीय सुबिधाओं की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कारागार में सब कुछ मिला ठीक-ठाक।ब्यूरो चीफ फूलचन्द्र अयोध्या

प्रथम विश्व युद्ध
ऑस्ट्रिया के सिंहासन के उत्तराधिकारी आर्चड्युक फर्डिनेंड और उनकी पत्नी का वध इस युद्ध का तात्कालिक कारण था। यह घटना 28 जून 1914, को सेराजेवो में हुई थी। एक माह के बाद ऑस्ट्रिया ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध घोषित किया। रूस, फ़्रांस और ब्रिटेन ने सर्बिया की सहायता की और जर्मनी ने आस्ट्रिया की। 
साम्राज्यवाद (Imperialism): प्रथम विश्व युद्ध से पहले अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्से कच्चे माल की उपलब्धता के कारण यूरोपीय देशों के बीच विवाद का विषय बने हुए थे। जब जर्मनी और इटली इस उपनिवेशवादी दौड़ में शामिल हुए तो उनके विस्तार के लिये बहुत कम संभावना बची। इसका परिणाम यह हुआ कि इन देशों ने उपनिवेशवादी विस्तार की एक नई नीति अपनाई। यह नीति थी दूसरे राष्ट्रों के उपनिवेशों पर बलपूर्वक अधिकार कर अपनी स्थिति को सुदृढ़ किया जाए। बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा और अधिक साम्राज्यों की इच्छा के कारण यूरोपीय देशों के मध्य टकराव में वृद्धि हुई जिसने समस्त विश्व को प्रथम विश्व युद्ध में धकेलने में मदद की। इसी प्रकार मोरक्को तथा बोस्निया संकट ने भी इंग्लैंड एवं जर्मनी के बीच प्रतिस्पर्द्धा को और बढ़ावा दिया।
अपने प्रभाव क्षेत्र में वृद्धि करने के उद्देश्य से जर्मनी ने जब बर्लिन-बगदाद रेल मार्ग योजना बनाई तो इंग्लैंड के साथ-साथ फ्राँस और रूस ने इसका विरोध किया, जिसके चलते इनके बीच कटुता मेंऔर अधिक वृद्धि हुई।
बहुजन प्रेरणा दैनिक समाचार पत्र व बहुजन इंडिया 24 न्यूज़ (सम्पादक- मुकेश भारती ) किसी भी शिकायत के लिए सम्पर्क करे – 9336114041


सैन्यवाद (Militarism): 20वीं सदी में प्रवेश करते ही विश्व में हथियारों की दौड़ शुरू हो गई थी। वर्ष 1914 तक जर्मनी में सैन्य निर्माण में सबसे अधिक वृद्धि हुई। ग्रेट ब्रिटेन और जर्मनी दोनों ने इस समयावधि में अपनी नौ-सेनाओं में काफी वृद्धि की। सैन्यवाद की दिशा में हुई इस वृद्धि ने युद्ध में शामिल देशों को और आगे बढ़ने में मदद की।
वर्ष 1911 में आंग्ल जर्मन नाविक प्रतिस्पर्द्धा के परिणामस्वरूप ‘अगादिर का संकट’ उत्पन्न हो गया। हालाँकि इसे सुलझाने का प्रयास किया गया परंतु यह प्रयास सफल नहीं हो सका। वर्ष 1912 में जर्मनी में एक विशाल जहाज़ ‘इम्प रेटर’ का निर्माण किया गया जो उस समय का सबसे बड़ा जहाज़ था। इससे इंग्लैंड और जर्मनी के मध्य वैमनस्य एवं प्रतिस्पर्द्धा में वृद्धि हुई।
राष्ट्रवाद (Nationalism): जर्मनी और इटली का एकीकरण भी राष्ट्रवाद के आधार पर ही किया गया था। बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवाद की भावना अधिक प्रबल थी। चूँकि उस समय बाल्कन प्रदेश तुर्की साम्राज्य के अंतर्गत आता था, अतः जब तुर्की साम्राज्य कमज़ोर पड़ने लगा तो इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने स्वतंत्रता की मांग शुरू कर दी।

बोस्निया और हर्जेगोविना में रहने वाले स्लाविक लोग ऑस्ट्रिया-हंगरी का हिस्सा नहीं बना रहना चाहते थे, बल्कि वे सर्बिया में शामिल होना चाहते थे और बहुत हद तक उनकी इसी इच्छा के परिणामस्वरूप प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई। इस तरह राष्ट्रवाद युद्ध का कारण बना।रूस का मानना था कि स्लाव यदि ऑस्ट्रिया-हंगरी एवं तुर्की से स्वतंत्र हो जाता है तो वह उसके प्रभाव में आ जाएगा, यही कारण रहा कि रूस ने अखिल स्लाव अथवा सर्वस्लाववाद आंदोलन को बल दिया। स्पष्ट है कि इससे रूस और ऑस्ट्रिया–हंगरी के मध्य संबंधों में कटुता आई।इसी तरह के और भी बहुत से उदाहरण रहे जिन्होंने राष्ट्रवाद की भावना को उग्र बनाते हुए संबंधों को तनावपूर्ण स्थिति में ला खड़ा किया। ऐसा ही एक उदाहरण है सर्वजर्मन आंदोलन।
आईपीसी की धारा 207 में विधि का क्या प्राविधान है

IPC की धारा 207 का विवरण :जो कोई किसी सम्पत्ति को, या उसमें के किसी हित को, यह जानते हुये कि ऐसी सम्पत्ति या हित पर उसका कोई अधिकार या अधिकारपूर्ण दावा नहीं है, कपटपूर्वक प्रतिगृहीत करेगा, प्राप्त करेगा, या उस पर दावा करेगा, अथवा किसी संपत्ति या उसमें के किसी हित पर किसी अधिकार के बारे में जानते हुए की इस पर उसका कोई वैधानिक अधिकार नहीं है और हड़पने , छीनने के आशय से मिथ्या दावा करेगा तो वह व्यक्ति धारा 207 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा। विधिक सलाहकार -मुकेश भारती एड0


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