Mainpuri News:जिलाधिकारी ने जिला स्वास्थ्य विभाग के कार्यो की समीक्षा बैठक की:बहुजन प्रेस
1 min read
|
😊 Please Share This News 😊
|
संवाददाता :: मैनपुरी::अवनीश कुमार {C016} :: Published Dt.30.01.2023 :Time:8:56PM :जिलाधिकारी ने जिला स्वास्थ्य विभाग के कार्यो की समीक्षा बैठक की:बहुजन प्रेस

बहुजन प्रेरणा ( हिंदी दैनिक समाचार पत्र ) व बहुजन इंडिया 24 न्यूज़ (डिजिटल मीडिया)
Mainpuri News । ब्यूरो रिपोर्ट :अवनीश कुमार । जिलाधिकारी ने जिला स्वास्थ्य विभाग के कार्यो की समीक्षा बैठक की
जिलाधिकारी ने समीक्षा बैठक के दौरान जनपद के सरकारी चिकित्सालयों में माह दिसंबर में मात्र 30 सीजर डिलीवरी पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की
मैनपुरी – जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में स्वास्थ्य विभाग के कार्यो की समीक्षा के दौरान जनपद के सरकारी चिकित्सालयों में माह दिसंबर में मात्र 30 सीजर डिलीवरी पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि 04 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में से मात्र महिला चिकित्सालय में सीजर किए जा रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य केंद्र कुरावली, किशनी, घिरोर पर सीजर नहीं हो रहे हैं। जिस कारण गरीब परिवार की गभर्वती महिलाओं का निजी चिकित्सालय द्वारा शोषण किया जा रहा है, सीजर के नाम पर उनसे काफी धनराशि की वसूली की जा रही है। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को निदेर्शित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य केंद्र कुरावली पर तत्काल एफ.आर.यू. प्रारंभ कराए जाएं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर माह में कम से कम 60 सीजर प्रत्येक दशा में किए जाएं, प्रसूता को नाश्ता, दोपहर, शाम का खाना समय से उपलब्ध कराया जाए, प्रसव के उपरांत डिस्चार्ज होने पर प्रत्येक दशा में जननी सुरक्षा योजना का लाभ, जन्म प्रमाण पत्र मुहैया कराया जाए, प्रसूता को 102 एंबुलेंस से ही भेजा जाए, खाने की गुणवत्ता प्रभारी चिकित्साधिकारी, अन्य जिम्मेदार अधिकारी द्वारा खाकर चेक करें।
श्री सिंह ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग की संचालित योजनाओं की प्रगति निराशाजनक है। संबंधित प्रभारी चिकित्साधिकारी इस ओर ध्यान दें, जननी सुरक्षा योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, नियमित टीकाकरण, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कायर्क्रम आदि की प्रगति सुधारें। उन्होने संस्थागत प्रसव की समीक्षा के दौरान पाया कि वाषिर्क लक्ष्य 25451 के सापेक्ष माह दिसम्बर 2022 तक 16716 संस्थागत प्रसव हुये हैं। इस पर उन्होंने संबंधित प्र. चिकित्साधिकारियों को संस्थागत प्रसव की प्रगति सुधारने, प्रसूताओं, आशाओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ समय से उपलब्ध कराने के निदेर्श दिये। उन्होंने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कायर्क्रम की समीक्षा के दौरान कहा कि सभी प्राथमिक विद्यालयों, आंगनवाडी केंद्रों का रोस्टर बनाकर बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला कायर्क्रम अधिकारी को उपलब्ध कराया जाए, जिस दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम विद्यालय, आंगनवाडी केंद्र के बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण करने जाएं, उस तिथि को पंजीकृत सभी बच्चे विद्यालय, आंगनवाडी केंद्र पर उपस्थित रहें, परीक्षण के दौरान जिन बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्या पायी जाएं, उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जाए।
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्र हिंदपुरम में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की प्रगति बेहद खराब पाए जाने पर स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी को चेतावनी जारी करने के निदेर्श देते हुए कहा कि इस महत्वपूणर् योजना का लाभ प्रथम बार गभर्धारण करने वाली प्रत्येक गभर्वती को मिले, आशा, आंगनवाडी के माध्यम से गांव-गांव योजना के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए, प्रथम बार गभर्धारण करने वाली महिलाओं को चिन्हित कर उन्हें तीन किश्तों में रू. 5000 की धनराशि मुहैया करायी जाए। उन्होंने कहा कि पोषण पुनवार्स केंद्र में किसी भी दिन कोई बेड खाली न रहे, अति कुपोषित, कुपोषित बच्चों को पोषण पुनवार्स केंद्र में भर्ती कराकर उन्हें सुपोषण की श्रेणी में लाया जाए, बाल विकास परियोजना अधिकारी, प्रभारी चिकित्साधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के अति कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को पोषण पुनवार्स केंद्र में भतीर् कराने हेतु प्रेरित करें।
मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार ने परिवार कल्याण के अन्तगर्त महिला नसबंदी की प्रगति सुधारने हेतु सामुदायिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कैंप आयोजित कर महिला नसबन्दी के लक्ष्य की पूर्ति करने हेतु निदेर्शित किया। उन्होने प्र. चिकित्साधिकारियों से कहा कि अपने-अपने स्वास्थ्य केंद्र पर नेतृत्व देकर स्वास्थ्य विभाग की संचालित योजनाओं की प्रगति सुधारें, स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाले मरीजों के साथ बेहतर व्यवहार कर उन्हें स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करें, आशा, ए.एन.एम., आंगनवाड़ी कायर्कत्रियों का सहयोग लेकर अधिक से अधिक संस्थागत प्रसव कराए जाएं। जनपद में संचालित अल्ट्रा साउंड सेंटर का नियमित रूप से निरीक्षण हो, कोई भी अल्ट्रा साउंड सेंटर अनाधिकृत रूप से संचालित न हो। संचालित अल्ट्रा साउंड सेंटर निधार्रित नियमों, मानकों का पालन करें, सुनिश्चित किया जाये। उन्होने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना में गोल्डन कार्ड बनाए जाने की प्रगति सुधारने, गोल्डन कार्ड धारकों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पाने के लिए गोल्डन कार्ड का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाये।
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.पी.पी. सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. मदन लाल, मुख्य चिकित्साधीक्षक महिला डा. ए.के. पचैरी, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव राय, डा. संजीव राव बहादुर, डा. राकेश कुमार, डा. अनिल वर्मा सहित समस्त प्र. चिकित्साधिकारी, स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी रविंद्र गौर, मलेरिया अधिकारी एस.एन. सिंह, डॉ. अनिल यादव, डी.एम.सी. यूनिसेफ संजीव पांडेय, एस.एम.ओ. डा. वी.पी. सिंह, बाल विकास परियोजना अधिकारी अरविन्द कुमार, डी.पी.एम. संजीव आदि उपस्थित रहे।
“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।”
अर्थ – कबीर दास जी के दोहे से समझ में आता है कि संसार की बड़ी-बड़ी पुस्तकें पढ़कर कितने ही लोग मृत्यु के द्वार तक पहुंच गए, मगर वे सभी विद्वान नहीं हो सके थे। वे कहते हैं कि इतन पढ़ने के बजाय अगर कोई प्रेम या प्रेम के ढाई अक्षर ही पढ़ ले यानी कि प्रेम के वास्तविक रूप को पहचान ले तो वह सच्चा ज्ञानी माना जाएगा।
” जिन्दगी का हर एक छोटा हिस्सा ही
हमारी जिदंगी की सफ़लता का बड़ा हिस्सा होता है।”
आईपीसी की धारा 504 में विधि का क्या प्राविधान है

IPC की धारा 504 का विवरण :जो कोई किसी अगर कोई शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना या गाली गलौज करेगा , Intentional insult with intent to provoke breach of the peace ) यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी न्यायधीश द्वारा विचारणीय है। यह अपराध पीड़ित / अपमानित व्यक्ति द्वारा समझौता करने योग्य है। जैसे अ ने ब को अपमानित करने के लिए माँ बहन की गालिया या किसी प्रकार की गालियां या गाली गलौज करेगा जिससे ब का मान मर्दन को ठेस पहुंचे या फिर उसको भड़काकर उकसाकर मारपीट किया जा सके या लोक शांति भंग किया जा सके।
विधिक सलाहकार -मुकेश भारती एड0।Dt.28-01-2023
अथवा
जो कोई किसी व्यक्ति को साशय अपमानित करेगा या गाली गलौज करेगा और तद्द्वारा उस व्यक्ति कोइस आशय से
या यह सम्भाव्य जानते हुए, प्रकोपित करेगा कि ऐसे प्रकोपन से वह लोक शान्ति भंग या कोई अन्य अपराध कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
अपमानित /लोक शान्ति भंग से आशय ; जो कोई किसी व्यक्ति को प्रकोपित करेगा कि ऐसे प्रकोपन से वह लोक शान्ति भंग या कोई अन्य अपराध कारित करेगा ह, वह अपमानित करता है। यह कहा जाता है।
विधिक सलाहकार -मुकेश भारती एड0।Dt.28-01-2023
नोट : दण्ड प्रक्रिया संहिता के अनुसार : यह जमानतीय और असंज्ञेय अपराध है जमानत कोई जुडिसियल मजिस्ट्रेट दे सकता है।
जलियांवाला बाग हत्याकांड:
आज़ादी के आंदोलन में हज़ारों निहत्थे पुरुष, महिलाएँ और बच्चे : 13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग में आयोजित एक शांतिपूर्ण बैठक में रॉलेट एक्ट 1919 का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों पर बिना बताये ब्रिगेडियर जनरल रेगीनाल्ड डायर ने गोली चलाने का आदेश दिया था, जिसमें हज़ारों निहत्थे पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मारे गए थे। इस कांड में मारे गए लोग रॉलेट एक्ट 1919 का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। इस हत्या काण्ड का बदला लेने के लिए वर्ष 1940 में सरदार उधम सिंह ने जनरल डायर की हत्या कर दी थी। वीरेंद्र कुमार : प्रवक्ता – उस्मानी डिग्री कॉलेज लखीमपुर खीरी (यूजीसी नेट-इतिहास ) Dt. 19-12-2022


क्या है रॉलेट एक्ट 1919 को जाने :
प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के दौरान भारत की ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी आपातकालीन शक्तियों की एक शृंखला बनाई जिसका उद्देश्य विध्वंसक गतिविधियों का मुकाबला करना था।इस संदर्भ में सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली राजद्रोह समिति की सिफारिशों पर यह अधिनियम पारित किया गया था। इस अधिनियम ने सरकार को राजनीतिक गतिविधियों को दबाने के लिये अधिकार प्रदान किये और दो साल तक बिना किसी मुकदमे के राजनीतिक कैदियों को हिरासत में रखने की अनुमति दी।
जलियांवाला बाग हत्या काण्ड की पृष्ठभूमि: महात्मा गांधी इस तरह के अन्यायपूर्ण कानूनों के खिलाफ अहिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करना चाहते थे, जो 6 अप्रैल, 1919 को शुरू हुआ। 9 अप्रैल, 1919 को पंजाब में दो राष्ट्रवादी नेताओं सैफुद्दीन किचलू और डॉ सत्यपाल को ब्रिटिश अधिकारियों ने बिना किसी वारेंट के गिरफ्तार कर लिया। इससे भारतीय प्रदर्शनकारियों में आक्रोश पैदा हो गया जो 10 अप्रैल को हज़ारों की संख्या में अपने नेताओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिये निकले थे।भविष्य में इस प्रकार के किसी भी विरोध को रोकने हेतु सरकार ने मार्शल लॉ लागू किया और पंजाब में कानून-व्यवस्था ब्रिगेडियर-जनरल डायर को सौंप दी गई। घटना का दिन: 13 अप्रैल, बैसाखी के दिन अमृतसर में निषेधाज्ञा से अनजान ज़्यादातर पड़ोसी गाँव के लोगों की एक बड़ी भीड़ जालियांवाला बाग में जमा हो गई।इस बड़ी भीड़ को तितर बितर करने के लिए ब्रिगेडियर- जनरल डायर अपने सैनिकों के साथ घटनास्थल पर पहुँचा। सैनिकों ने जनरल डायर के आदेश के तहत सभा को घेर कर एकमात्र निकास द्वार को अवरुद्ध कर दिया और निहत्थे भीड़ पर गोलियाँ चलाना शुरू कर दी दीं, जिसमें 1000 से अधिक निहत्थे पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की मौत हो गई।
जलियांवाला बाग हत्याकांड की घटना का महत्त्व:जलियांवाला बाग भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण स्थल बन गया और अब यह देश का एक महत्त्वपूर्ण स्मारक है।जलियांवाला बाग त्रासदी उन कारणों में से एक थी जिसके कारण महात्मा गांधी ने अपना पहला, बड़े पैमाने पर और निरंतर अहिंसक विरोध (सत्याग्रह) अभियान, असहयोग आंदोलन (1920–22) का आयोजन शुरू किया।इस घटना के विरोध में बांग्ला कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1915 में प्राप्त नाइटहुड की उपाधि का त्याग कर दिया।भारत की तत्कालीन सरकार ने घटना (हंटर आयोग) की जाँच का आदेश दिया, जिसने वर्ष 1920 में डायर के कार्यों के लिये निंदा की और उसे सेना से इस्तीफा देने का आदेश दिया। वीरेंद्र कुमार : प्रवक्ता – उस्मानी डिग्री कॉलेज लखीमपुर खीरी (यूजीसी नेट-इतिहास ) Dt. 19-12-2022
|
व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें |
[responsive-slider id=1466]


