Mainpuri News:इंडियन जर्नालिस्ट एसोसिएशन का जनपदीय पत्रकार सम्मलेन इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन मैनपुरी में बुलंदियां पर:बहुजन प्रेस
1 min read
|
😊 Please Share This News 😊
|
संवाददाता :: मैनपुरी::अवनीश कुमार {C016} :: Published Dt.30.01.2023 :Time:8:56PM :इंडियन जर्नालिस्ट एसोसिएशन का जनपदीय पत्रकार सम्मलेन इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन मैनपुरी में बुलंदियां पर:बहुजन प्रेस

बहुजन प्रेरणा ( हिंदी दैनिक समाचार पत्र ) व बहुजन इंडिया 24 न्यूज़ (डिजिटल मीडिया)
Mainpuri News । ब्यूरो रिपोर्ट :अवनीश कुमार । इंडियन जर्नालिस्ट एसोसिएशन का जनपदीय पत्रकार सम्मलेन इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन मैनपुरी में बुलंदियां पर
मैनपुरी- इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन एक संगठन नहीं एक ऐसा मिशन है जो गरीब मजलूम लोगों की आवाज बनता है। मैनपुरी की पत्रकारिता ने पहले भी बुलंदियां छुई हैं ।कलम के सिपाही किसी के आगे झुकते नहीं है। जनपदीय पत्रकार सम्मान समारोह में राज मैरिज हॉल में चल रहे कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे दीवानी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरव यादव ने कहा कि पत्रकारिता किसी की मोहताज नहीं है। निष्पक्ष पत्रकारिता अपनी एक अलग पहचान बनाती है। पत्रकार एक कलम का सिपाही होता है। वो कलम जो गरीब मजलूम दबे कुचले लोगों की आवाज उठाता है। उसे ही असली पत्रकारिता कहते हैं। दीवानी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के सभी सम्मानित पत्रकार साथियों ने जो मुझे सम्मान दिया है ,मेरा जो सम्मान किया है।हम आपके हमेशा आभारी रहेंगे। पत्रकार साथियों हम
आपको आश्वासन देते हैं कि दीवानी बार एसोसिएशन के अधिवक्ता ही नहीं हम जिलाध्यक्ष और हमारे सचिव इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के साथ हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे। इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के छोटे से लेकर बड़े पदाधिकारी तक अगर कोई समस्या आती है तो दीवानी बार एसोसिएशन आपके दुख सुख में हमेशा साथ खड़ा रहेगा ।आप मुझे रात के 12 बजे भी याद करोगे तो यह सौरव यादव रात नहीं देखेगा ।आपके दुख सुख में उसी समय खड़ा होगा। अध्यक्ष ने कहा अगर आप संगठन बना के रहेंगे तो चाहै हुए जिला स्तर का कोई भी अधिकारी हो या कोई राजनेता हो आप आपकी और आपकी कलम की इज्जत करेगा। अगर संगठन बिखर गया तो कहीं भी आपको सम्मान नहीं मिलेगा। इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अजय दीक्षित उर्फ सोनू ने कहा कि हमारे साथी कभी रास्ता भटक जाते हैं ।हम चाहते हैं कि हमारे एसोसिएशन के लोग एक दूसरे के दुख सुख में हमेशा साथ खड़े रहे। हम आपसे वादा करते हैं हमारे एसोसिएशन के किसी भी पदाधिकारी के ऊपर अगर कोई परेशानी आती है तो यह जिलाध्यक्ष आपकी हर समस्या का समाधान करने का प्रयास करेगा ।अजय दीक्षित आपके साथ खड़ा है ।और जब आप संगठित रहेंगे तभी हम आपका सहयोग कर पाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष साकिब अनवर चिश्ती ने कहा कि इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन मैनपुरी में आसमान की ऊंचाइयों छू रहा है। मेरा साथी चाहे हुए जिला मुख्यालय पर पत्रकारिता कर रहा हो या फिर कस्बा स्तर या गांव क्षेत्र में पत्रकारिता कर रहा हो। अगर वह इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन का सिपाही है तो हमारी एसोसिएशन उसके साथ उसके दुख सुख में हमेशा खड़ी है ।अगर हमारी एसोसिएशन का सदस्य भी नहीं है अगर वह पत्रकार है। तो हम उसकी हर संभव सहायता करने के लिए तैयार हैं। प्रदेश अध्यक्ष साकिब अलवर चिश्ती ने कहा कि हमारे साथी पर किसी भी समाज या किसी विभाग का अधिकारी या कर्मचारी पर अगर कोई उत्पीड़न करता है तो हम बिना सोचे समझे अपने साथी की मदद करने के लिए तैयार हैं।इस मौके पर समाजसेवी धर्मवीर थाने को एवं आओ दोस्त राही ने भी अपने विचार व्यक्त किए ।पत्रकार राकेश रागी ने भी पत्रकार सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में पत्रकारों को पत्रकारिता के बारे में बताया । उन्हें निष्पक्ष पत्रकारिता करने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद झा, दीपक कठेरिया, नदीम सिद्दीकी, विजय अब्रेस, राजमोहन शाक्य अनिल शाक्य सलमान मंसूरी, प्रमोद पांडे, मीडिया प्रभारी श्री कृष्ण सिंह दीपक शर्मा अतुल सक्सेना प्रवीण सक्सेना आफाक अली अंकित शुक्ला अवनीश कुमार शिवकुमार अच्छे आर्यन अरुण यादव पुष्पेंद्र चौहान देवेंद्र कुमार नूर हसन यूनुस खान देवेंद्र पाल अगम चौहान संदीप पचौरी सत्येंद्र कुमार, अवनीश कुमार जाटव, अमित कौशिक सहित सैकड़ों की संख्या में जिला स्तर के और कस्बा करहल, घिरोर, बरनाहल ,भोगांव ,बेवर सहित जिले भर के पत्रकार मौजूद रहे। प्रदेश अध्यक्ष साकिब अनवर चिश्ती एवं जिला अध्यक्ष अजय दीक्षित ने पत्रकार सम्मेलन के दौरान दूरदराज एवं मुख्यालय से सम्मेलन में सम्मिलित होने वाले पत्रकार साथियों को सम्मानित किया।
“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।”
अर्थ – कबीर दास जी के दोहे से समझ में आता है कि संसार की बड़ी-बड़ी पुस्तकें पढ़कर कितने ही लोग मृत्यु के द्वार तक पहुंच गए, मगर वे सभी विद्वान नहीं हो सके थे। वे कहते हैं कि इतन पढ़ने के बजाय अगर कोई प्रेम या प्रेम के ढाई अक्षर ही पढ़ ले यानी कि प्रेम के वास्तविक रूप को पहचान ले तो वह सच्चा ज्ञानी माना जाएगा।
” जिन्दगी का हर एक छोटा हिस्सा ही
हमारी जिदंगी की सफ़लता का बड़ा हिस्सा होता है।”
आईपीसी की धारा 504 में विधि का क्या प्राविधान है

IPC की धारा 504 का विवरण :जो कोई किसी अगर कोई शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना या गाली गलौज करेगा , Intentional insult with intent to provoke breach of the peace ) यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी न्यायधीश द्वारा विचारणीय है। यह अपराध पीड़ित / अपमानित व्यक्ति द्वारा समझौता करने योग्य है। जैसे अ ने ब को अपमानित करने के लिए माँ बहन की गालिया या किसी प्रकार की गालियां या गाली गलौज करेगा जिससे ब का मान मर्दन को ठेस पहुंचे या फिर उसको भड़काकर उकसाकर मारपीट किया जा सके या लोक शांति भंग किया जा सके।
विधिक सलाहकार -मुकेश भारती एड0।Dt.28-01-2023
अथवा
जो कोई किसी व्यक्ति को साशय अपमानित करेगा या गाली गलौज करेगा और तद्द्वारा उस व्यक्ति कोइस आशय से
या यह सम्भाव्य जानते हुए, प्रकोपित करेगा कि ऐसे प्रकोपन से वह लोक शान्ति भंग या कोई अन्य अपराध कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
अपमानित /लोक शान्ति भंग से आशय ; जो कोई किसी व्यक्ति को प्रकोपित करेगा कि ऐसे प्रकोपन से वह लोक शान्ति भंग या कोई अन्य अपराध कारित करेगा ह, वह अपमानित करता है। यह कहा जाता है।
विधिक सलाहकार -मुकेश भारती एड0।Dt.28-01-2023
नोट : दण्ड प्रक्रिया संहिता के अनुसार : यह जमानतीय और असंज्ञेय अपराध है जमानत कोई जुडिसियल मजिस्ट्रेट दे सकता है।
जलियांवाला बाग हत्याकांड:
आज़ादी के आंदोलन में हज़ारों निहत्थे पुरुष, महिलाएँ और बच्चे : 13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग में आयोजित एक शांतिपूर्ण बैठक में रॉलेट एक्ट 1919 का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों पर बिना बताये ब्रिगेडियर जनरल रेगीनाल्ड डायर ने गोली चलाने का आदेश दिया था, जिसमें हज़ारों निहत्थे पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मारे गए थे। इस कांड में मारे गए लोग रॉलेट एक्ट 1919 का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। इस हत्या काण्ड का बदला लेने के लिए वर्ष 1940 में सरदार उधम सिंह ने जनरल डायर की हत्या कर दी थी। वीरेंद्र कुमार : प्रवक्ता – उस्मानी डिग्री कॉलेज लखीमपुर खीरी (यूजीसी नेट-इतिहास ) Dt. 19-12-2022


क्या है रॉलेट एक्ट 1919 को जाने :
प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के दौरान भारत की ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी आपातकालीन शक्तियों की एक शृंखला बनाई जिसका उद्देश्य विध्वंसक गतिविधियों का मुकाबला करना था।इस संदर्भ में सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली राजद्रोह समिति की सिफारिशों पर यह अधिनियम पारित किया गया था। इस अधिनियम ने सरकार को राजनीतिक गतिविधियों को दबाने के लिये अधिकार प्रदान किये और दो साल तक बिना किसी मुकदमे के राजनीतिक कैदियों को हिरासत में रखने की अनुमति दी।
जलियांवाला बाग हत्या काण्ड की पृष्ठभूमि: महात्मा गांधी इस तरह के अन्यायपूर्ण कानूनों के खिलाफ अहिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करना चाहते थे, जो 6 अप्रैल, 1919 को शुरू हुआ। 9 अप्रैल, 1919 को पंजाब में दो राष्ट्रवादी नेताओं सैफुद्दीन किचलू और डॉ सत्यपाल को ब्रिटिश अधिकारियों ने बिना किसी वारेंट के गिरफ्तार कर लिया। इससे भारतीय प्रदर्शनकारियों में आक्रोश पैदा हो गया जो 10 अप्रैल को हज़ारों की संख्या में अपने नेताओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिये निकले थे।भविष्य में इस प्रकार के किसी भी विरोध को रोकने हेतु सरकार ने मार्शल लॉ लागू किया और पंजाब में कानून-व्यवस्था ब्रिगेडियर-जनरल डायर को सौंप दी गई। घटना का दिन: 13 अप्रैल, बैसाखी के दिन अमृतसर में निषेधाज्ञा से अनजान ज़्यादातर पड़ोसी गाँव के लोगों की एक बड़ी भीड़ जालियांवाला बाग में जमा हो गई।इस बड़ी भीड़ को तितर बितर करने के लिए ब्रिगेडियर- जनरल डायर अपने सैनिकों के साथ घटनास्थल पर पहुँचा। सैनिकों ने जनरल डायर के आदेश के तहत सभा को घेर कर एकमात्र निकास द्वार को अवरुद्ध कर दिया और निहत्थे भीड़ पर गोलियाँ चलाना शुरू कर दी दीं, जिसमें 1000 से अधिक निहत्थे पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की मौत हो गई।
जलियांवाला बाग हत्याकांड की घटना का महत्त्व:जलियांवाला बाग भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण स्थल बन गया और अब यह देश का एक महत्त्वपूर्ण स्मारक है।जलियांवाला बाग त्रासदी उन कारणों में से एक थी जिसके कारण महात्मा गांधी ने अपना पहला, बड़े पैमाने पर और निरंतर अहिंसक विरोध (सत्याग्रह) अभियान, असहयोग आंदोलन (1920–22) का आयोजन शुरू किया।इस घटना के विरोध में बांग्ला कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1915 में प्राप्त नाइटहुड की उपाधि का त्याग कर दिया।भारत की तत्कालीन सरकार ने घटना (हंटर आयोग) की जाँच का आदेश दिया, जिसने वर्ष 1920 में डायर के कार्यों के लिये निंदा की और उसे सेना से इस्तीफा देने का आदेश दिया। वीरेंद्र कुमार : प्रवक्ता – उस्मानी डिग्री कॉलेज लखीमपुर खीरी (यूजीसी नेट-इतिहास ) Dt. 19-12-2022
|
व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें |
[responsive-slider id=1466]


