बिरसा मुंडा का संघर्ष-सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक आज़ादी का संघर्ष:भारतीय मूलनिवासी संगठन
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संवाददाता : : :: :: Date ::15 .11 .2022 : :बिरसा मुंडा का संघर्ष जल-जंगल-जमीन पर मालिकाना हक़ के लिये था, जो कि आज भी आदिवासी समाज देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार संघर्ष करता आ रहा है। विघटनकारी शक्तियाँ अपनी साम-दाम-दंड-भेद की नीतियों से देश के साधन संसाधनों पर कब्ज़ा करके देश के मूलनिवासी बहुसंख्यक वर्ग को हर स्तर पर कमज़ोर करने के प्रयास में लगीं हुईं हैं। जो आज राज पाठ पर काबिज हैं, वे कभी नहीं चाहेंगे कि हमारे महापुरुषों का नाम और इतिहास में अमर हो!
जो मिशनरी साथी आज भी सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं उन्हें बिरसा मुंडा जैसे महान क्रांतिकारियों को याद करके उनके संघर्ष की गाथा को आने वाली पीढ़ियों के दिमाग़ में भी स्थानांतरित करने की सख्त जरूरत है। बाबा साहेब डा० भीमराव अम्बेडकर द्वारा बताये गए रास्ते पर चलते हुए गाँव गाँव और गली गली में कैडर कैम्पों के माध्यम से हम अपने समाज के कमजोर वर्ग के लोगो को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करके समाज की महान विभूतियों के इतिहास को अमर कर सकते हैं। ऐसे पाखंडी त्योहारों पर रोक लगनी चाहिए, जिनको मनाते हुए हर वर्ष कई मासूम लोगों की मौत हो जाती है।भारतीय मूलनिवासी संगठन BMS
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