अंधविश्वास व पांखड वाद पर जोरदार प्रहार किया संदीप बौद्ध जी व श्रद्धेय पूनम बौद् जी
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अंधविश्वास व पांखड वाद पर जोरदार प्रहार किया संदीप बौद्ध जी
नमो बुद्धाय जय भीम साथियों🙏🙏
दिनांक 12दिसम्बर 2021को न्यू मंगोलपुरी गांव दिल्ली में भीम ग्यान चर्चा का आयोजन किया गया जिसमें महिलाओं वह पुरूषों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया जिसमें मुख्य रूप से महिलाओं को जो हक़ अधिकार बाबा साहेब जी ने दिये उनको अवगत कराया गया अंधविश्वास व पांखड वाद पर जोरदार प्रहार संदीप बौद्ध जी ने किया मुख्य रूप से 25दिसम्बर के बारे में बताया गया जिसमें मुख्य वक्ता श्रद्धेय संदीप बौद्ध जी व श्रद्धेय पूनम बौद् जी रही स्वाति बौद्ध ने एक सुंदर भीम वंदना की प्रस्तुति की यूथ फार सोसिल जस्टिस की टीम ने बाबा साहेब जी की तस्वीर भेंट की प्रोग्राम के आयोजक कर्ता फूलासिंह जी, व प्रवीण बौद्ध जी का बहुत-बहुत आभार जिसमें निवेदन कर्ता शिवकुमार बौद्ध जी, वेदप्रकाश गौतम जी सुन्दर बौद्ध जी लक्ष्मण बौद्ध जी, शम्भु दयाल बौद्ध जी कुलदीप बौद्ध जी रहे सभी का बहुत-बहुत आभार 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏




हितकारिणी सभा में संगठन का घोषवाक्य ‘ शिक्षित बनाओ , चेताओ ,संगठित करो
Ambedkar Mission:हितकारिणी सभा में संगठन का घोषवाक्य ‘ शिक्षित बनाओ , चेताओ ,संगठित करो ‘ ( Educate , Agitate , Orgnise ) मूलतः इस वाक्य का विस्तारित अर्थ सभा में तय किया गया था वह यह है ,” लोगों को शिक्षित करो ,उनके मन में अपनी दुर्दशा के प्रति चिढ़ उत्पन्न करो और उनका संगठन
बनाओ ” बाद के दिनों में इस घोषवाक्य को इस तरह पहचान प्राप्त हुई हैं – ” शिक्षित बनो , संगठित बनो और संघर्ष करो “ ( Educate , Orgnise , Agitate ) ( पहले घोषवाक्य में अछूत समाज प्रधान तत्त्व था,वहीं दूसरे वाक्य में समूह प्रधान तत्त्व है,दलित आंदोलन में शिक्षित समूह शिक्षित बनते गया , साथ में समाज से आए गरीब लोग भी शिक्षित होते गए और वह समाज का बुद्धिजीवी समूह बनते चला गया , साथ – साथ उपभोगवादी भी बनते गया ,कुछ हद तक वह संगठित भी हुआ, लेकिन संघर्ष करते वक्त अपने स्थापित होने के मार्गक्रमण में वह संकुचित बनते गया,समाज को शिक्षत करना ,उन्हें उनकी दीन – हीन स्थिति के प्रति सावधान करना ,उन्हें जागरूक करना , उनके मन में दीन -हीन अवस्था के प्रति चिढ़ उत्पन्न करना ,फिर उन्हें संगठित करना संभव नहीं हो सका,यदि हम समाज के शिक्षित समूह के प्रति विश्लेषित आशय से विचार करें ,तो वह एक अजगर बन गया है,ऐसा अजगर कि जिसे पेट भरने के लिए किसी नीतिशास्त्र की आवश्यकता नहीं है,उसे तो सिर्फ खाना चाहिए, क्यों न दलित समाज के पूर्ण संसाधन ही उन पर लुटा दिए जाएं ? उनका पेट नहीं भरता है, संसाधन भी कितने हैं ? सरकारी नौकरियां और आंबेडकरी आंदोलन से छेड़- छाड़ करने पर शराब की दुकान ,राशन दुकान , स्कूल ,कॉलेज इत्यादि।

दिनांक 20 जुलाई ,1924 को विधिवत ‘ बहिष्कृत हितकारणी सभा ‘ की स्थापना की गई, बहिष्कृत हितकारणी सभा का कामकाज माननीय शिवतरकर के हाथों में रहता था ,कुछ जातिगत कारणों से महार समाज के समाज

सेवक माननीय शिवतरकर से नाराज थे ,उन लोगों में कानाफूसी चलती रहती थी ,उस वक्त बाबासाहेब डॉ . आंबेडकर ने शिवतरकर विरोधियों से कहा था।
अछूतों की समस्याएं हिमालय की तरह भयंकर हैं,इस हिमालय में टक्कर मार कर मैं अपना सिर फोड़ने वाला हूं ,हिमालय के धराशायी न होने पर मेरा रक्तरंजित सिर देख कर सात करोड़ अछूत लोग उस हिमालय को जमीन में गाड़ने के लिए एक पैर पर तैयार हो जाएंगे और उसके लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर देंगे ,इसे तुम लोगों ने अच्छी तरह याद रखना चाहिए यदि तुम लोग आपस में इस तरह द्वेष करने लगे ,तब मैं ही क्या ? खुद कोई ईश्वर भी कुछ नहीं कर सकेगा,बाबासाहेब डॉ . आंबेडकर के कहने का असर सभी लोगों पर पड़ा,बाद में सब लोग मिलकर शिवरतकर से सहयोग करने लगे। “डा.बी.आर.अम्बेडकर”——-मिशन अम्बेडकर. Facebook Post-श्रद्धेय एस चंद्रा बौद्ध लेखक व वरिष्ठ साहित्यकार
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